जयशंकर ने फिर से पाकिस्तान को आइना दिखाया
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के अडिग रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि आतंकवादियों और उनके पीड़ितों को एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत कभी भी पहलगाम आतंकी हमले जैसे जघन्य अपराधों के अपराधियों को उनके शिकार हुए निर्दोष लोगों के बराबर नहीं मानेगा। यह बयान उन्होंने ब्रिटिश विदेश सचिव डेविड लैमी के साथ नई दिल्ली में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान दिया।
जयशंकर ने हैदराबाद हाउस में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत के अंतरराष्ट्रीय साझेदार भी इस नीति को समझेंगे और इसका सम्मान करेंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम कभी भी बुराई करने वालों को पीड़ितों के बराबर नहीं मानेंगे।” उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को समर्थन देने के लिए ब्रिटिश सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
ब्रिटिश विदेश सचिव डेविड लैमी 7 जून को दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर दिल्ली पहुंचे हैं। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य यूके-भारत के बीच आर्थिक और प्रवासन साझेदारी की समीक्षा करना और उसे आगे बढ़ाना है। जयशंकर ने लैमी का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक बेहद अच्छी रही और यह यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों के लिए एक सकारात्मक संदेश देती है। उन्होंने कहा कि यह अवसर दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी का आकलन करने का है, जो हाल के दिनों में सभी क्षेत्रों में मजबूत हुई है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया हो। पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए कई आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक तबाह कर पाकिस्तान को सबक सिखाया था। हाल ही में, रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों से लड़ने के लिए अटूट प्रतिबद्धता दोहराई थी। इस प्रतिनिधिमंडल ने 31 मई से 3 जून तक यूके के थिंक टैंकों, यूके सरकार के मंत्रियों और भारत के मित्र समूहों के साथ गहन बातचीत भी की थी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की पोल खोलना था।
जयशंकर का यह बयान वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की मुखर आवाज और अपनी जनता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता और अपराधियों को उनके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, न कि उन्हें पीड़ितों के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।