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चंडीगढ़ नगर निगम घोटाला के जांच की गाड़ी आगे बढ़ी

116.84 करोड़ रुपये की फर्जी एफडीआर का खुलासा

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम के गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से नागरिक निकाय को फंड ट्रांसफर करने की प्रक्रिया के दौरान 116.84 करोड़ रुपये के एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ। आधिकारिक जांच में पाया गया है कि इस विशाल राशि के एवज में दी गई फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें पूरी तरह से जाली थीं। प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, यह मामला तब प्रकाश में आया जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के फंड को नगर निगम के खातों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस विशेष लेनदेन के लिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में एक समर्पित बैंक खाता खोला गया था। आरोप है कि बैंक के एक तत्कालीन प्रबंधक ने कथित तौर पर इस खाते से जुड़ी कई एफडीआर जारी कीं, जिनका कुल मूल्य 116.84 करोड़ रुपये था।

शुरुआती दौर में सब कुछ सामान्य प्रतीत हो रहा था, लेकिन जब नगर निगम के सतर्कता विभाग और ऑडिट टीम ने इन रसीदों का बैंक के रिकॉर्ड से भौतिक सत्यापन कराया, तो बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि उनके रिकॉर्ड में इन नंबरों की कोई वैध एफडीआर मौजूद नहीं है। यह पुष्टि होते ही स्पष्ट हो गया कि बैंक प्रबंधक और संभवतः कुछ अन्य बाहरी तत्वों ने मिलकर जाली दस्तावेज तैयार किए थे।

इस खुलासे के तुरंत बाद, चंडीगढ़ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 338 (जालसाजी), 336(3), 340(2), 61(2) और 316(5) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब उन सभी डिजिटल और कागजी सबूतों को खंगाल रही है जिनके आधार पर ये रसीदें जारी की गई थीं।

प्रशासनिक अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इतनी बड़ी राशि का घोटाला बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं है। वर्तमान में बैंक कर्मियों के साथ-साथ नगर निगम के उन कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है, जो फंड ट्रांसफर की इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे थे। अधिकारी उन परिस्थितियों का विश्लेषण कर रहे हैं जिनमें खाता खोलने की अनुमति दी गई और बिना पर्याप्त सुरक्षा जांच के इन एफडीआर को स्वीकार किया गया। इस मामले ने स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन और ऑडिट प्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।