Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Patna Coaching Firing Case: खान सर को मिली अग्रिम जमानत; कोचिंग सेंटर विवाद में कोर्ट का बड़ा फैसला Ram Mandir Donation Row: अयोध्या पहुंचे नृपेंद्र मिश्र; ट्रस्ट के दान-चढ़ावे के विवाद पर बंद कमरे मे... Lucknow Crime News: नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त; पुलिस कमिश्नर से मांगा ज... Lucknow Crime News: पुलिस भर्ती परीक्षा देने आई छात्राओं से दरिंदगी की कोशिश; एनकाउंटर में गिरफ्तार ... Sitamarhi News: सीतामढ़ी में आंधी-बारिश का कहर; झोपड़ी पर गिरा विशाल पेड़, एक ही परिवार के 5 लोगों क... Noida Crime News: लग्जरी लाइफस्टाइल का शौक बन रहा युवाओं की बर्बादी का कारण; 217 युवा अब सलाखों के प... Weather Update: दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में गर्मी का कहर जारी; 11 जून से बारिश और राहत की उम्मीद परिमल नथवाणी का आना महज राजनीति नहीं मानिए क्वांटम प्रयोग में परमाणु उल्टा घूमता देखा गया स्थानीय स्तर पर झड़पों में 25 नागा महिला घायल

अब अफ्रीका से चीता आयात की जरूरत नहीं

विशेषज्ञों ने तमाम मुद्दों पर विचार के बाद राय जाहिर की

  • प्राकृतिक जीवन से छेड़खानी गलत

  • खुले घास के मैदानों की भी कमी है

  • चीतों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारत की महत्वाकांक्षी परियोजना प्रोजेक्ट चीता एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह वैज्ञानिक जगत की चिंताएं हैं। प्रतिष्ठित वन्यजीव वैज्ञानिकों और पारिस्थितिकी विशेषज्ञों ने सरकार से आग्रह किया है कि वह अफ्रीका से चीतों का आयात तुरंत बंद करे। उनका तर्क है कि पर्याप्त और उपयुक्त आवास के बिना लगातार नए चीते लाना न केवल पारिस्थितिक रूप से गलत है, बल्कि इन जानवरों के कल्याण के खिलाफ भी है।

वैज्ञानिकों, जिनमें डॉ. रवि चेलम जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं, का कहना है कि भारत में चीतों के लिए खुले और विशाल घास के मैदानों की भारी कमी है। वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या वहां की वहन क्षमता से अधिक होने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीतों को रहने के लिए सैकड़ों वर्ग किलोमीटर का मुक्त क्षेत्र चाहिए, जबकि भारत में वे छोटे बाड़ों या सीमित वन क्षेत्रों में रहने को मजबूर हैं।

इस आलोचना का एक बड़ा हिस्सा चीतों की मृत्यु दर और उनके प्रबंधन के तरीके पर केंद्रित है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि बार-बार रेडियो कॉलर बदलने या चिकित्सा जांच के लिए उन्हें बेहोश करना उनके प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित कर रहा है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह आयात जारी रहा, तो यह परियोजना केवल एक सफारी पार्क बनकर रह जाएगी, जिसका पारिस्थितिक संतुलन में कोई योगदान नहीं होगा। इसके बजाय, विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि यह संसाधन भारत की स्थानीय लुप्तप्राय प्रजातियों, जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, के संरक्षण में लगाए जाने चाहिए।

दूसरी ओर, सरकार इन आलोचनाओं को खारिज करती रही है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब 53 चीते हैं, जिनमें स्थानीय स्तर पर जन्मे 33 शावक भी शामिल हैं। हाल ही में फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 9 नए चीते लाए गए हैं। सरकार का मानना है कि गांधी सागर अभयारण्य जैसे नए क्षेत्रों के तैयार होने से आवास की समस्या हल हो जाएगी। हालांकि, वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक मौजूदा चीते पूरी तरह से जंगल में स्थापित नहीं हो जाते, तब तक नए बैच मंगाना जोखिम भरा है।