Breaking News in Hindi

यह कसरत दिल को धड़कनों को सुधार देता है

नियमित व्यापार के दूसरे लाभों की भी जानकारी दी

  • पुराने ढांचे को कसकर सुधार देता है

  • पहले इस फायदे का पता नहीं चला था

  • हर रोज के व्यायाम से ही लाभ मिलता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः आमतौर पर यह माना जाता है कि नियमित व्यायाम करने से दिल की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्त संचार बेहतर होता है। लेकिन हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध ने इस धारणा को एक नया आयाम दिया है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि शारीरिक कसरत न केवल दिल को मजबूत बनाती है, बल्कि यह दिल को नियंत्रित करने वाली नसों के नेटवर्क (वायरिंग) को भी पूरी तरह से नया रूप दे देती है। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने पहली बार यह खोज की है कि नियमित एरोबिक एक्सरसाइज शरीर के दाएं और बाएं दोनों तरफ दिल को नियंत्रित करने वाले तंत्रिका तंत्र को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करती है।

ऑटोनोमिक न्यूरोसाइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन दिल से जुड़ी बीमारियों के इलाज में एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह शोध मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि कैसे व्यायाम हमारे शरीर के ‘ऑटोपायलट’ सिस्टम यानी स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को रीमॉडल करता है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

इस शोध के मुख्य लेखक डॉ. ऑगस्टो कोप्पी (यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल) के अनुसार, ये तंत्रिका समूह दिल के लिए एक डिमर स्विच की तरह काम करते हैं। व्यायाम इस स्विच को दोनों तरफ अलग-अलग तरीके से बदलता है। चूहों पर 10 सप्ताह तक किए गए इस अध्ययन में ‘स्टीरियोलॉजी’ नामक उन्नत 3D इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया गया। शोध के परिणाम बेहद चौंकाने वाले थे।

व्यायाम करने वाले जीवों में शरीर के दाहिने हिस्से में स्थित कार्डियोवैस्कुलर नर्व क्लस्टर में न्यूरॉन्स की संख्या बिना व्यायाम करने वालों की तुलना में लगभग चार गुना बढ़ गई। इसके साथ ही दाहिनी ओर के न्यूरॉन्स का आकार थोड़ा छोटा हो गया। इसके विपरीत, बाईं ओर के न्यूरॉन्स की संख्या में तो वृद्धि नहीं हुई, लेकिन उनका आकार पहले से लगभग दोगुना हो गया। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि व्यायाम दिल के तंत्रिका तंत्र को दोनों तरफ अलग-अलग और विशिष्ट तरीकों से पुनर्गठित  करता है।

यह खोज मेडिकल साइंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दिल की अनियमित धड़कन, तनाव के कारण होने वाला ब्रोकन-हार्ट सिंड्रोम और सीने का दर्द जैसी समस्याओं का इलाज अक्सर गर्दन के निचले और छाती के ऊपरी हिस्से में स्थित ‘स्टेलेट गैंग्लिया’ नामक नर्व हब की सक्रियता को कम करके किया जाता है। अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि दोनों तरफ की नसें कैसे प्रतिक्रिया देती हैं। लेकिन इस रिसर्च के बाद, भविष्य में डॉक्टर नर्व ब्लॉक या डिनरवेशन जैसी जटिल प्रक्रियाओं को किसी एक विशेष तरफ (बाएं या दाएं) लक्षित करके अधिक प्रभावी बना सकेंगे।

यद्यपि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और चूहों पर किया गया है, लेकिन शोधकर्ताओं को पूरी उम्मीद है कि इंसानों में भी ऐसे ही पैटर्न देखने को मिलेंगे। शोध टीम का अगला कदम यह जांचना है कि ये संरचनात्मक बदलाव दिल के प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करते हैं और क्या इंसानों में भी यह लेफ्ट-राइट पैटर्न इसी तरह काम करता है। यदि ऐसा होता है, तो आने वाले समय में दिल की बीमारियों का इलाज पूरी तरह से पर्सनलाइज्ड हो जाएगा।

#HeartHealth #ExerciseScience #MedicalResearch #CardiologyNews #FitnessMotivation #दिलकीसेहत #व्यायामकेफायदे #स्वास्थ्यसमाचार #मेडिकलरिसर्च #फिटनेस