प्यार और तकरार यानी युद्ध में धीर धरने का अपना महत्व होता है। अभी भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव जैसी स्थिति है। पहलगाम हमले के बाद से यह गर्मी बढ़ने लगी थी।
पाकिस्तान की सीमा के भीतर बने आतंकवादी शिविरों पर भारत के सटीक हमले के बाद यह और बढ़ गया है। तोपखाने से तोप के गोले दागे जा रहे हैं। लोगों की जान जा रही है लेकिन इसके बीच जो सबसे बड़ा खतरा सामने नजर आ रहा है, वह है टीवी चैनलों का युद्धोन्माद।
फेसबुक पर लिखकर पूछा था कि किसी चैनल वाले ने अब तक यह नहीं कहा है कि भारतीय सीमा पाकिस्तान के अंदर जाकर अब ईरान की सीमा तक जा पहुंची है।
दरअसल टीवी चैनल देखकर यह तय कर पाना कठिन हो रहा है कि आखिर हो क्या रहा है। दूसरी तरफ भारतीय सेना और विदेश मंत्रालय जो जानकारी दे रहे हैं, उसके मुताबिक पाकिस्तान की तरफ से भी ड्रोन और मिसाइल हमले भारत के कई शहरों पर किये गये थे, जिन्हें नाकाम कर दिया गया है।
लिहाजा टीवी चैनल वालों से गुजारिश है कि थोड़ी धीर धरे वरना वह टीवी चैनल के न्यूज रूम में बैठकर ही पाकिस्तान जीत लेंगे। वैसे यही हाल पाकिस्तानी चैनलों का भी है। उनके हिसाब से भी पाकिस्तान की सेना ने भारतीय हमले का मुंहतोड़ जबाव दिया है।
फर्क सिर्फ इतना है कि पाकिस्तानी चैनल खुलकर यह नहीं कह पा रहे हैं कि भारत ने जिन ठिकानों पर हमला किया, वे दरअसल क्या था। हाफिज सईद और मसूद अजहर का नाम भी वे नहीं ले रहे हैं क्योंकि उन्हें भी पता है कि उनकी अपनी हालत भारतीय टीवी चैनलों के एंकरों से बुरी है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ते तनाव के बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी विभागों को आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। संचार में व्यवधान को रोकने, दहशत को दूर करने और आकस्मिकताओं से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है।
पीएम ने विभागों को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और घबराहट में खरीददारी पर कड़ी नजर रखने और किसी भी ‘फर्जी खबर’ को नकारने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जहां से छोड़ा था, वहीं से अपनी बात शुरू की, जहां एक सूत्र ने उनके हवाले से सहकर्मियों से कहा यह तो बस शुरुआत है।
मंत्रिमंडल की बैठक भारत द्वारा पाकिस्तान और पीओके में आतंकी शिविरों पर सटीक हमले करने के ठीक बाद हुई थी।लगभग 20 सचिवों की एक बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे उनके निर्देशों को पूरा करने के लिए पहल करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिसमें महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा शामिल है।
पीएमओ की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशनल निरंतरता और संस्थागत लचीलेपन को बनाए रखने के लिए मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
सचिवों को अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों के संचालन की व्यापक समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह देखा जा सके कि आवश्यक प्रणालियों के कामकाज में कोई गड़बड़ी न हो और उन्हें किसी भी साइबर हमले से बचाया जा सके।
परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, उपभोक्ता मामलों के विभागों के सचिवों के साथ-साथ बुनियादी ढांचा क्षेत्र के सचिव भी इस बैठक में शामिल हुए।
सूत्रों ने बताया कि प्रत्येक सचिव को किसी भी संकट से निपटने के लिए मौजूद प्रणालियों के बारे में बोलने के लिए कुछ मिनट दिए गए।
इसी बात पर फिल्म चित्रलेखा का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था साहिर लुधियानवी ने और संगीत में ढाला था रोशन ने। इसे मोहम्मद रफी ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल इस तरह हैं
मन रे तू काहे ना धीर धरे
वो निर्मोही मोह ना जाने, जिनका मोह करे
मन रे …
इस जीवन की चढ़ती ढलती
धूप को किसने बांधा
रंग पे किसने पहरे डाले
रुप को किसने बांधा
काहे ये जतन करे
मन रे …
उतना ही उपकार समझ कोई
जितना साथ निभा दे
जनम मरण का मेल है सपना
ये सपना बिसरा दे
कोई न संग मरे
मन रे …
तो एंकरों, ध्यान रहे यह युद्ध है चुनाव नहीं, जिसमें माहौल बनाना जरूरी है। बिना जांचे परखे कुछ भी दर्शकों को परोस देने का गलत नतीजा भी निकल सकता है।
चैनल पर प्रसारित होने वाली फर्जी सूचनाओं का भी गलत तरीके से वैश्विक इस्तेमाल हो सकता है। किसकी टीआरपी सबसे ज्यादा, यह होड़ बाद में भी हो सकती है। अभी देश और देश के भविष्य का सवाल है। इसलिए करांची पर हमला से लेकर इस्लामाबाद फतह और पाकिस्तानी सेना में बगावत जैसे शीर्षकों का कोई काम नहीं है। इससे देश गुमराह होता है और इससे बचने की जरूरत है।