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योगी ने साधु संतों के बीच मतभेद खत्म किया

महाकुंभ का बहुत बड़ा और पुराना विवाद सुलझाया गया

  • अखाड़ों में लंबे समय से मतभेद था

  • मुगलों के प्रतीक नाम बदले गये

  • हिंदी नाम से भेजा गया आमंत्रण

प्रयागराजः सनातन के सबसे बड़े पर्व महाकुंभ में लंबे समय से चले आ रहे पेशवाई और शाही स्रान को मुगलों का प्रतीक मानते हुए साधु-संतों के विरोध को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाम शाही स्रान को अमृत स्रान और पेशवाई को नगर प्रवेश घोषित कर अखाड़ों के मतभेद को समाप्त कर दिया है।

साधु-संतो में अमृत स्रान और पेशवाई को नगर प्रवेश से मुख्यमंत्री की घोषणा से खुशी का ठिकाना नहीं रहा। साधु संतों का कहना है कि श्री योगी ने मुगल काल से चले आ रहे उनके प्रतीक को समाप्त कर सनातन के परचम का सम्मान बढ़ाया है। महाकुंभ में संतों और श्रद्धालुओं के त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने के दौरान सभी छह स्रान पर्वों पर पुष्प वर्षा कर संतो और श्रद्धालुओं का सम्मान करार दिया। संतों का कहना है कि इससे पहले यह सम्मान साधु-संत और श्रद्धालुओं को नहीं मिलता था।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी और महामंत्री महंत हरि गिरि (जूना अखाड़ा) ने शाही स्रान की जगह राजसी स्रान और पेशवाई की जगह छावनी प्रवेश करने का प्रस्ताव रखा था। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों 13 अखाडों के प्रतिनिधियों के साथ परेड में हुई बैठक में सुझाव मांगे थे।

परिषद ने इन नामों को शासन के पास भेजा था। इसके बाद से शाही स्रान की जगह राजसी स्रान और पेशवाई की जगह छावनी प्रवेश लिखा जाने लगा था। अखाड़ा परिषद के दूसरे धडे श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत यमुना पुरी की ओर से महाकुंभ के आमंत्रण पर शाही स्रान की जगह कुंभ मेला अमृत स्रान और पेशवाई की जगह कुंभ मेला छावनी प्रवेश यात्रा लिख कर आमंत्रण भेजाना शुरू कर दिया है।

इस आमंत्रण पत्र में 02 जनवरी 2025 को कुंभ मेला छावनी प्रवेश शोभायात्रा (पेशवाई) और प्रथम कुंभ अमृत स्रान 14 जनवरी, द्वितीय कुंभ अमृत स्रान 29 जनवरी और तृतीय कुंभ अमृत स्रान 03 फरवरी लिखा हुआ है। महंत यमुना पुरी ने बताया कि महाकुंभ के दौरान अखाड़ों की पेशवाई और शाही स्रान सदियों से इस्तेमाल होते आए हैं।

पेशवाई और शाही स्रान जैसे शब्द गुलामी के प्रतीत होते रहे हैं। इन नामों को मुगल काल में रखा गया होगा। महाकुंभ 2025 में गुलामी के प्रतीक वाले इन नामों को बदलने की चर्चा चल रही थी। जिसको देखते हुए हिंदी भाषा का नामकरण किया गया है। अखाड़े के आमंत्रण पत्र समेत अन्य दस्तावेजों में भी पेशवाई की जगह कुंभ मेला छावनी प्रवेश शोभायात्रा और शाही स्रान की जगह पर कुंभ अमृत स्रान नाम कर दिया गया है। इसी कार्ड के जरिये अखाड़े के संत, महंत, महामंडलेश्वर और अन्य लोगों को आमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को महाकुंभ मेले की तैयारियों की जांच करने दिसंबर में ही मंगलवार को पांचवी बार पहुंचे थे। उन्होने एक सप्ताह के भीतर अधूरे कार्यो को पूरा करने का अल्टीमेटम दिया। यहीं पर मीडिया से बातचीत के दौरान शाही स्रान को अमृत स्रान और पेशवाई को नगर प्रवेश घोषित कर मुगलों के प्रतीक और अखाड़ों के भी मतभेद को समाप्त कर दिया।