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डॉ भारती कश्यप को महिला नेत्र चिकित्सकों की सोसायटी से सम्मान

सामाजिक उत्प्रेरक के तौर पर कार्य को मिला सम्मान

  • दिल्ली में प्रदान किया गया यह सम्मान

  • सर्वाइकल कैंसर में अमूल्य योगदान रहा

  • नेत्रदान जागरुकता पर पूरे राज्य में काम किया

  • महिलाओं की कैंसर जांच का झारखंड मॉडल

रांचीः पूर्वी भारत की प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भारती कश्यप को गत 7 अक्टूबर, 2024 को नई दिल्ली में महिला नेत्र रोग विशेषज्ञ सोसायटी द्वारा सामाजिक परिवर्तन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान उनके सामाजिक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। नई दिल्ली में एक भव्य समारोह में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता एवं भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा प्रदान किया गया।

वर्ष 1991 में डाक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद रामगढ़ से अंधापन नियंत्रण की दिशा में उनका प्रयास महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर चुका है। अब तक करीब बीस लाख से अधिक स्कूली छात्रों को इसका फायदा झारखंड में मिला है। वह अपने नेत्र शिविरों में हजारों लोगों का इलाज कर चुकी हैं, जिनमें आदिम जनजाति समूह के लोग, मानव तस्करी के शिकार लोग, अखबार बेचने वाले, मधुमेह रोगी, वृद्धाश्रम में रहने वाले लोग, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग, स्पास्टिक बच्चे, खिलाड़ी और यहां तक कि ट्रक चालक भी शामिल हैं।

यह वह दौर था जब लोगों में नेत्रदान के प्रति कोई जागरूकता नहीं थी। इस सामाजिक आवश्यकता को समझते हुए डॉ भारती कश्यप ने लोगों को मृत्युपरांत नेत्रदान के लिए उप्रेरित करने और जागरूकता फैलाने का काम किया। इससे समाज में इसके प्रति लोगों का ध्यान गया। डॉ. कश्यप के प्रयासों से झारखंड (तब एकीकृत बिहार) ने 1996 में अपना पहला मरणोपरांत नेत्रदान देखा। और तब से उनके प्रयासों से राज्य में सैकड़ों नेत्रदान हुए हैं। विगत 33 वर्षों से यह काम निरंतर जारी है।

साल 2014 में डॉ. भारती कश्यप ने झारखंड में वैश्विक जानलेवा बीमारी – सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ अभियान की शुरुआत करके महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। इस पहले से असमय काल कवलित होने वाली हजारों महिलाओं को बचाया जा सका। इस दिशा में उन्होंने कम लागत वाली एक कारगर झारखंड मॉडल को तैयार किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों के तीसरे भाग को संशोधित करते हुए बहुआयामी कम लागत वाली लेकिन प्रभावी रणनीति झारखंड मॉडल की अवधारणा तैयार की। जो झारखंड की महिलाओं के लिए फायदेमंद साबित हुआ है।

झारखंड में पहली बार प्रजनन आयु वर्ग की 2.70 लाख महिलाओं की जांच करने के राज्य सरकार के लक्ष्य के मुकाबले, अप्रैल 2021 से जुलाई 2024 के बीच प्रजनन आयु वर्ग की कुल 4,05,749 महिलाओं की गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच की गई। डॉ भारती कश्यप के प्रयासों से झारखंड में धीरे-धीरे एक बड़ा सामाजिक बदलाव आ रहा है क्योंकि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं न केवल प्रजनन स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक हो रही हैं बल्कि हजारों अन्य लोगों को गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर जैसी घातक बीमारियों के प्रति जागरूक भी कर रही हैं।