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अध्यक्ष ने कर्मचारी चयन आयोग से इस्तीफा दिया

झारखंड की अफसरशाही में शह मात का खेल और तेज


  • प्रश्न पत्र लीक मामले की चर्चा

  • ब्यूरोक्रेसी के दांव पेंच से परेशान

  • लीक प्रूफ व्यवस्था के बाद भी आरोप


राष्ट्रीय खबर

रांचीः कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व डीजीपी नीरज सिन्हा  ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्य के मुख्य सचिव को भेजे गये पत्र में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा देने तथा स्वतः ही पदभार परित्याग करने की बात कही है।

पत्र में किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किये जाने के बाद भी ऐसा माना जाता है कि राज्य की अफसरशाही में चल रही राजनीति से तंग आकर उन्होंने यह पद छोड़ा है। परीक्षा संबंधी विवाद को तिल का ताड़ बनाने में भी राज्य के कुछ प्रभावशाली अफसरों की भूमिका धीरे धीरे स्पष्ट हो रही थी। चौक चौराहों पर भी यह बात आ गयी थी कि ईडी के निशाने पर मौजूद एक वरीय नौकरशाह ने कई राजनीतिक दलों से मिलकर इसकी साजिश को अंजाम दिया था।

परीक्षा के संचालन में आयोग की भूमिका के बारे में एक पूर्व नौकरशाह ने विस्तार से इसकी जानकारी पत्रकारों को कई साल पहले दी थी। वह भी इस पद पर तैनात थे। उन्होंने साफ कर दिया था कि यहां परीक्षा संबंधी संचालन में आयोग से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष कोई भूमिका ही नहीं होती।

एक सवाल के उत्तर में तभी बताया गया था कि आयोग के किसी भी अफसर अथवा कर्मचारी को प्रश्नपत्र के बारे में कोई पूर्व सूचना होने की कोई संभावना ही नहीं है क्योंकि यह पूरी व्यवस्था ही इस तरीके से बनायी गयी है। इसके बाद भी झारखंड की परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने की घटना पर राजनीतिक बवाल मच गया था।

स्वाभाविक तौर पर इसकी जांच के बीच ही इस मसले पर पर्दे के पीछे से संचालित होने वाली गतिविधियों की तरफ खोजी पत्रकारों का ध्यान गया था। इसमें साफ हो गया था कि प्रश्न पत्र लीक होने के मामले को इस तरीके से उछालने में राज्य की ब्यूरोक्रेसी की भूमिका रही है। जो किसी कारण से इस मसले को इस तरीके से प्रचारित कर रहे थे कि प्रश्न पत्र लीक होने में आयोग के किसी व्यक्ति की भूमिका है।

अंदरखाने के लोग इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि दरअसल इस गिरोह के निशाने पर राज्य के पूर्व डीजीपी नीरज सिन्हा ही थे क्योंकि हेमंत सोरेन द्वारा उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपा जाना खास तौर पर एक अफसर को पसंद नहीं आया था। उसी समय से माहौल बनाने के लिए ताना बाना बुना जाने लगा था। वैसे बता दें कि यह अधिकारी खुद भी कई फैसलों की वजह से ईडी के निशाने पर है और कभी भी गिरफ्तार भी हो सकता है।