बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित होगा ChatGPT, OpenAI ने पेश किए नए ‘टीन फीचर्स’ और चाइल्ड सेफ्टी ब्लूप्रिंट
ओपनएआई (OpenAI) 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के लिए चैटजीपीटी (ChatGPT) को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। कंपनी इसके लिए नए ‘टीन फीचर्स’ के साथ एक ‘चाइल्ड सेफ्टी ब्लूप्रिंट’ लेकर आई है, जो बच्चों को एआई का सुरक्षित व जिम्मेदार इस्तेमाल सिखाने और इसके गलत उपयोग को रोकने का काम करेगा।
एआई जरूरत पड़ने पर यूज़र को ब्रेक लेने की सलाह देगा, पढ़ाई के दौरान सीधे जवाब देने के बजाय स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया समझाएगा और संवेदनशील कंटेंट पर पहले से अधिक सख्त सुरक्षा मानक लागू करेगा। इसके साथ ही पेरेंट्स को भी कुछ विशेष कंट्रोल्स मिलेंगे, जिनकी मदद से वे बच्चों के एआई इस्तेमाल पर नजर रख सकेंगे। इसके तहत चैटजीपीटी में नए सेफ्टी फीचर्स, पैरेंटल कंट्रोल और एडवांस्ड स्टडी मोड जैसे महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं।
🤖 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के लिए अलग होगा ChatGPT एक्सपीरियंस
ओपनएआई ने बताया कि 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के लिए चैटजीपीटी में विशेष टीन फीचर्स जोड़े जा रहे हैं। यदि सिस्टम को यह पता चलता है कि यूज़र की उम्र 18 साल से कम है, तो उसे अपने आप ‘टीन एक्सपीरियंस मोड’ में भेज दिया जाएगा।
इस मोड में पहले से ज्यादा सुरक्षा दी जाएगी ताकि बच्चे एआई का जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर सकें। कंपनी का कहना है कि उसका उद्देश्य बच्चों को एआई तकनीक से दूर रखना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और रचनात्मक तरीके से इसका उपयोग करना सिखाना है।
⏰ ब्रेक रिमाइंडर और पेरेंट्स के लिए मिलेंगे नए सुरक्षा कंट्रोल्स
नए फीचर्स के तहत, यदि कोई किशोर लंबे समय तक लगातार चैटजीपीटी का इस्तेमाल करेगा, तो उसे बीच-बीच में ब्रेक लेने की सलाह देने वाला रिमाइंडर स्क्रीन पर दिखाई देगा।
इसके अलावा, माता-पिता अब चैटजीपीटी में लगाए गए कुछ कंट्रोल्स को अपनी जरूरत और बच्चों की उम्र के हिसाब से कस्टमाइज कर सकेंगे। इससे वे यह तय कर पाएंगे कि बच्चा एआई का इस्तेमाल किस तरह और कितनी देर करे। ओपनएआई का कहना है कि इससे परिवारों को बच्चों के सुरक्षित डिजिटल इस्तेमाल में बड़ी मदद मिलेगी।
📚 ‘स्टडी मोड’ में सीधे जवाब नहीं देगा एआई, स्टेप-बाय-स्टेप समझाएगा कॉन्सेप्ट
ओपनएआई ने स्टडी मोड (Study Mode) को भी पहले से अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया है। इस मोड में चैटजीपीटी सीधे होमवर्क या सवाल का उत्तर देने के बजाय स्टेप-बाय-स्टेप समझाएगा, ताकि छात्र खुद समाधान तक पहुंच सकें और उनकी सोचने की क्षमता विकसित हो सके।
कंपनी के मुताबिक, टीन यूज़र्स के लिए हिंसक कंटेंट, खुदकुशी या अवसाद से जुड़ी सामग्री और खतरनाक सोशल मीडिया वायरल ट्रेंड्स जैसे संवेदनशील विषयों पर पहले से ज्यादा कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना और जोखिम वाले कंटेंट से बच्चों का बचाव करना है।
🛡️ क्या है OpenAI के ‘चाइल्ड सेफ्टी ब्लूप्रिंट’ में खास? जानिए वैश्विक संगठनों की भूमिका
ओपनएआई ने इन नए फीचर्स के साथ एक व्यापक ‘चाइल्ड सेफ्टी ब्लूप्रिंट’ (Child Safety Blueprint) भी जारी किया है। इसमें एआई के जरिए होने वाले बच्चों के यौन शोषण (CSAM) और डिजिटल दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी, तकनीकी और संचालन स्तर पर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
कंपनी ने कहा कि उसने इस ब्लूप्रिंट को तैयार करने में नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रन, अटॉर्नी जनरल अलायंस और थॉर्न जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मिले सुझावों को शामिल किया है। इस ब्लूप्रिंट का मुख्य फोकस एआई से जनरेट या एडिट किए गए गलत कंटेंट पर कानूनी शिकंजा कसना, बेहतर रिपोर्टिंग मैकेनिज्म बनाना और एआई सिस्टम के निर्माण के शुरुआती चरण से ही सुरक्षा उपाय जोड़ना है।