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विक्रम और प्रज्ञान के सक्रिय होने की उम्मीद लगभग खत्म

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान हमेशा के लिए चांद की धरती में समा गए हैं। और उन्हें जगाया नहीं जा सकता। इसरो का चंद्रयान-3 की दूसरी पारी का सपना पूरा होना संभव नहीं है। क्योंकि चांद पर फिर से रात हो गई है और सूरज डूब गया है।

23 अगस्त को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास जमीन को छुआ। भारत इस क्षेत्र में अंतरिक्ष यान भेजने में सक्षम होने वाला पहला देश है। लैंडिंग के बाद रोवर की खुफिया जानकारी लैंडर के पेट से निकली। छह पहियों वाला रोवर घूमता रहा और चंद्रमा की सतह की जांच करता रहा। प्रज्ञान चांद पर 100 मीटर से ज्यादा दूरी पार कर चुका है।

उनके द्वारा एकत्रित की गई सारी जानकारी विक्रम के माध्यम से पृथ्वी तक पहुंची। लेकिन विक्रम ज्ञान की दुनिया में वापस नहीं लौटेगा। इसरो का चंद्रयान-3 चंद्र दिवस या 14 दिवसीय कार्यक्रम के तहत चंद्रमा तक गया। अपनी खोज में वैज्ञानिकों के हाथ कई अज्ञात जानकारियां लगी हैं।

दिन बीतने और रात होने पर विक्रम और प्रज्ञान चंद्रमा पर सक्रिय नहीं रह सके। क्योंकि उनकी ऊर्जा का स्रोत सूर्य था। नतीजा यह हुआ कि इसरो ने रात होने से पहले ही लैंडर, रोवर को सुला दिया। आशा थी कि भोर में सूर्य के प्रकाश से यंत्र पुनः जागृत हो जायेंगे। उस स्थिति में, विक्रम, प्रज्ञान चंद अपनी दूसरी पारी में कुछ अधिक बल्लेबाजी करेंगे लेकिन चंद्रमा पर दूसरी सुबह होने के बाद इन उपकरणों से संपर्क नहीं हो सका।

कई कोशिशों के बावजूद विक्रम या प्रज्ञान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। रात में चंद्रमा का तापमान शून्य से 250 डिग्री नीचे चला जाता है। इतनी भीषण सर्दी चंद्रयान-3 नहीं झेल सका। हालांकि, वैज्ञानिकों का एक समूह पहले ही कह चुका है कि विक्रम, प्रज्ञान के दोबारा जागने की उम्मीद कम है।

चंद्रयान-3 चंद्रमा पर जिस हिस्से में उतरा, उसका नामकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। नाम दिया गया शिव शक्ति पॉइंट। विक्रम, प्रज्ञान वहीं सोते रह गए। वैज्ञानिकों का कहना है, चंद्रयान-3 पहली पारी में उम्मीदों से बढ़कर रहा। इसरो के उपकरणों ने कुछ ऐसे काम किए हैं जिनकी उम्मीद नहीं थी। परिणाम स्वरूप यदि विक्रम या प्रज्ञान को जागृत न भी किया जा सका तो भी किसी को अधिक अफसोस नहीं होता। वैसे इन्हें जगाने की कोशिश आगे भी जारी रहेगी।