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खुफिया तंत्र की बड़ी सफलता और सर्वोच्च नेतृत्व का अंत

पहले ही झटके में इतनी बड़ी सफलता का राज पूर्व जानकारी

वाशिंगटनः मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए पिछले कई महीनों से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए थी। इस विस्तृत खुफिया जानकारी के आधार पर ही शनिवार को होने वाले हमलों के समय में अंतिम क्षणों में बदलाव किया गया था।

खुफिया तंत्र को यह पुख्ता जानकारी मिली थी कि शनिवार को सर्वोच्च नेता अपने शीर्ष कमांडरों और सरकारी अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं। जैसे ही इस बैठक की पुष्टि हुई, हमले के समय को उसके अनुसार समायोजित किया गया ताकि हाई-वैल्यू टारगेट्स को निशाना बनाया जा सके। इज़राइल भी पिछले कई महीनों से अपने स्वतंत्र खुफिया तंत्र के जरिए ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने की योजना बना रहा था।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की। इस संयुक्त अमेरिका-इज़राइल हमले ने तेहरान स्थित सैन्य ठिकानों और सरकारी केंद्रों को निशाना बनाया। रविवार को ईरानी सरकारी टेलीविजन ने अंततः पुष्टि की कि शनिवार को तेहरान में हुए इन हवाई हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई है। यह घटना ईरान के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक और सैन्य मोड़ माना जा रहा है।

अपने सर्वोच्च नेता की मृत्यु और सैन्य ठिकानों पर हमले के जवाब में, ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों का मुख्य निशाना इज़राइल, क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने और कई खाड़ी देश हैं। रविवार को इज़राइल ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उसकी वायु सेना तेहरान में नए लक्ष्यों पर बमबारी कर रही है ताकि ईरान की जवाबी क्षमता को कुचला जा सके।

तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में स्थिति तनावपूर्ण है। जहाँ एक ओर सरकारी तंत्र नेतृत्व के संकट से जूझ रहा है, वहीं आम नागरिकों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता है। संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देशों में भी हताहतों की खबरें आने से यह स्पष्ट है कि यह युद्ध अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे वैश्विक मानचित्र को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।