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ओडिशा राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले उलटफेर

बीजेडी और कांग्रेस का गठबंधन हुआ

राष्ट्रीय खबर

भुवनेश्वर: 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए ओडिशा की राजनीति में एक दिलचस्प समीकरण देखने को मिल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने राज्य की चार राज्यसभा सीटों के लिए दो उम्मीदवारों की घोषणा की है। हालांकि, विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद, पटनायक ने अपनी राजनीतिक चाल चलते हुए एक कॉमन कैंडिडेट (सर्वसम्मत उम्मीदवार) को मैदान में उतारा है।

पटनायक ने अपने राजनीतिक सचिव संत्रुप्त मिश्रा को आधिकारिक उम्मीदवार और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को कॉमन कैंडिडेट घोषित किया है। पटनायक ने सभी राजनीतिक दलों से डॉ. होता का समर्थन करने की अपील की है। डॉ. होता ओडिशा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के पहले कुलपति और कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रधानाचार्य रह चुके हैं।

पटनायक की यह रणनीति विपक्षी दलों (विशेषकर भाजपा) को मुश्किल में डालने और क्रॉस-वोटिंग रोकने के उद्देश्य से प्रेरित है। विधानसभा का गणित और जीत का समीकरण ओडिशा की 147 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान दलीय स्थिति इस प्रकार है। भाजपा: 79 विधायक (3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त), बीजेडी: 48 विधायक (हाल ही में 2 विधायक निलंबित), कांग्रेस: 14 विधायक, सीपीआई (एम): 1 विधायक।

राज्यसभा चुनाव के नियमों के अनुसार, एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को न्यूनतम 30 प्रथम-वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। आंकड़ों के आधार पर, भाजपा आसानी से 2 सीटें जीत सकती है और बीजेडी 1 सीट सुरक्षित कर सकती है। चौथी सीट के लिए संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। यदि भाजपा अपना तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो 2014 के बाद पहली बार राज्य में राज्यसभा चुनाव के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद पहली बार विपक्ष में आई बीजेडी ने कांग्रेस के साथ मिलकर एक नया राजनीतिक समीकरण बनाया है। ओडिशा कांग्रेस प्रमुख भक्त चरण दास ने घोषणा की है कि कांग्रेस राज्य के व्यापक हित में डॉ. होता का समर्थन करेगी। कांग्रेस की शर्त थी कि उम्मीदवार गैर-राजनीतिक और अपने क्षेत्र का दिग्गज होना चाहिए। बीजेडी के इस कदम को इंडिया गठबंधन की ओर झुकाव के रूप में भी देखा जा रहा है, हालांकि बीजेडी नेताओं का कहना है कि अभी किसी भी गठबंधन पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

डॉ. होता 40 वर्षों से चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और लाखों गरीबों की मदद करने का रिकॉर्ड रखते हैं। उनकी उम्मीदवारी को लेकर भाजपा अभी विचार कर रही है कि क्या वह अपना तीसरा उम्मीदवार उतारेगी या इस कॉमन कैंडिडेट का समर्थन करेगी।