Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अल-ओबेद में गहराता भुखमरी का संकट Gwalior Crime News: पुरानी रंजिश में युवक पर कुल्हाड़ी और सरिये से जानलेवा हमला; पुरानी छावनी पुलिस ... Train AC Maintenance: ट्रेनों में अब नहीं खराब होगा एसी! भोपाल वर्कशाप में 527 कोचों की होगी मरम्मत Housing Board Gwalior: चंबल कॉलोनी में सड़क पर पेड़ देख भड़के लोग; इंजीनियरों की लापरवाही पर खड़े हु... MP Urban Body Election 2027: प्रत्याशी चयन के लिए कांग्रेस ने कसी कमर; पुराने अनुभवों से सीखकर बनाई ... ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में कार्रवाई के बाद नाराज अमेरिका Madhya Pradesh Politics: सीएम मोहन यादव की संपत्ति पर छिड़ी जंग; बीजेपी विधायक ने रॉबर्ट वाड्रा का न... MP High Court on Missing Case: "अगर वह जिंदा होती तो खुद लौट आती"; 10 साल पुराने लापता केस में कोर्ट... Indore Honor Killing Case: इंदौर के पहले ऑनर किलिंग मामले में कोर्ट का फैसला; तेजकरण भालसे हत्याकांड... Jyotiraditya Scindia Guna Visit: गुना को मिली बड़ी सौगात; 42 करोड़ की कूनो नदी पुनर्जीवन परियोजना का ह...

मणिपुर में फिर हिंसा भड़की, पांच दिन और इंटरनेट सेवा बंद

  • दस आदिवासी विधायकों पुलिस पर लगाया बड़ा गंभीर आरोप

  • राज्य सरकार ने कुकी पुलिसवालों के हथियार वापस ले लिये हैं

  • सीएम एन बीरेन सिंह ने की शांति कायम की अपील

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: मणिपुर सरकार ने आगजनी की घटनाओं की खबरों के बाद अफवाहों, वीडियो, फोटो और संदेशों को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को पांच दिनों के लिए बढ़ा दिया, जो जातीय हिंसा प्रभावित मणिपुर में कानून और व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

मणिपुर के गृह आयुक्त एच ज्ञान प्रकाश ने 26 मई तक इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को बढ़ाते हुए एक अधिसूचना में कहा कि मणिपुर के पुलिस महानिदेशक ने बताया कि अभी भी घरों और परिसरों में आगजनी जैसी घटनाओं की खबरें आ रही हैं।

वहीं, मणिपुर में पिछले 19 दिनों से इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहने के कारण राज्य के लोग आनलाइन माध्यम से पैसे नहीं भेज पा रहे हैं और ना ही अन्य आवश्यक डिजिटल मंच का उपयोग कर पा रहे हैं।

वहीं हिंसा प्रभावित मणिपुर में आवश्यक वस्तुओं को लाने वाले ट्रकों की विशेष सुरक्षा के बीच आवाजाही जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पूर्वोत्तर राज्य में जरूरी सामान की कोई कमी न हो।

रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार, मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ सेना तथा असम राइफल्स राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-37) के जरिए आवश्यक सामान ले जाने वाले वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा कि ड्रोन और चीता हेलीकाप्टरों की मदद से हवाई निगरानी भी की जा रही है।

उधर, मणिपुर में हुई हिंसा के बाद 10 आदिवासी विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

आदिवासी विधायकों ने आरोप लगाया कि मैतेई और कुकी हिंसा से पहले मणिपुर सरकार के निर्देश पर मणिपुर पुलिस ने कुकी पुलिस से सभी शक्तियां छीन लीं और उन्हें निरस्त्र कर दिया।

हालांकि, मणिपुर में बीजेपी के नेतृत्व की सरकार है। यहां के दस विधायकों ने गृहमंत्री अमित शाह को लेटर लिखकर कुकी पुलिस के साथ अत्याचार का आरोप लगाया है। लेटर लिखने वाले विधायकों में 7 बीजेपी और 3 उसकी सहयोगी पार्टी कुकी पीपुल्स अलायंस के हैं।

इन लोगों ने राज्य में आदिवासियों के लिए अलग प्रशासन की मांग की है। आदिवासी विधायकों ने कहा कि वह अब एक साथ नहीं रह सकते। विधायकों के पत्र में यह भी आरोप लगाया कि सभी कुकी पुलिस अधिकारियों से सभी शक्तियां छीन ली गईं। राज्य की राजधानी इंफाल घाटी में और उसके आसपास रहने वाले मैतेई और पहाड़ियों में बसे कुकी जनजाति के बीच खूनी झड़प हुई है।

3 मई से लगातार हुई झड़प में कम से कम 94 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने  इंफाल में पुराने सचिवालय में आतंकवाद विरोधी दिवस पर एक कार्यक्रम के मौके पर बोलते हुए, अशांति के बाद राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने की चुनौतियों के बीच शांति का आह्वान किया। मुख्यमंत्री सिंह ने राज्य के लोगों से भी अपील की कि वे सरकार को दोष दें न कि समुदायों को।