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माउंट एवरेस्ट पर रहस्यमयी आवाजों का राज खुला

नईदिल्लीः माउंट एवरेस्ट पर रात के समय अजीबोगरीब और रहस्यमयी आवाजें सुनाई देती हैं। इस आवाज को लेकर कई किस्म की कहानियां काफी समय से प्रचलित थी। कुछ लोग तो इसे येती की आवाज भी कह देते थे जबकि येती एक ऐसा बर्फीला प्राणी है, जिसे आज तक देखा नहीं गया है और विज्ञान अब तक उसे कल्पना ही मानता है।

लेकिन माउंट एवरेस्ट पर अजीब किस्म की आवाज सिर्फ रात के वक्त सुनायी देती थी, यह वैज्ञानिकों को पता था। काफी लंबे समय से वैज्ञानिकों की टीम इस आवाज का स्रोत जानने की कोशिश कर रही थी। ग्लेशियोलॉजिस्ट की एक टीम ने शोर के स्रोत का पता लगाया। हाल ही में यह सामने आया।

ग्लेशियोलॉजिस्ट एवगेनी पोडॉल्स्की ने रहस्यमय शोर की व्याख्या की। उनके नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक समूह ने रहस्य को जानने के लिए एक सप्ताह के लिए नेपाल की ओर हिमालय की यात्रा की। वे ट्रैकर्डिंग-ट्रोम्बो ग्लेशियर की आवाजाही की जांच करने गए थे। वहां तीन सप्ताह से अधिक समय बिताएं।

पोडॉल्स्की कंपन को मापने के लिए ग्लेशियर में गहरे सेंसर लगाने का दावा करता है। पोडोल्स्की ने कहा कि इस मामले में भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया था। तीन हफ्ते ग्लेशियर पर बिताने के बाद रिसर्च टीम नीचे आई। पोडॉल्स्की ने कहा कि उन्होंने हिमालय से नीचे आने के बाद झटके के आंकड़ों की जांच की।

तब उन्होंने पाया कि रात में एवरेस्ट पर सुनाई देने वाली रहस्यमयी आवाजों का अत्यधिक ठंड से गहरा संबंध है। पोडॉल्स्की ने डेटा की जांच की और पाया कि रात में तापमान बहुत अधिक गिर जाने के कारण बर्फ में दरार पड़ने लगी थी। और उस वजह से अजीब सी आवाज भी सुनी जा सकती है, रिसर्च टीम का दावा है। इस वैज्ञानिक स्पष्टीकरण के आने के बाद कमसे कम उन कहानियों पर विराम लग जाएगा, जो आज तक इस आवाज को लेकर कही जाती थी। इन कहानियों की वजह से भ्रम भी काफी फैलता था।

दूसरी तरफ  बदरीनाथ धाम हाइवे पर हेलंग के पास पहाड़ी का एक हिस्सा भरभराकर सड़क पर गिर गया। हाइवे से गुजर रही एक कार पर भी मलबा गिरा था। चंडीगढ़ के दो यात्री कार में सवार थे जो मलबे के कारण घायल हो गये। वहीं हनुमान चट्टी में भी पहाड़ से पत्थर गिरने के कारण एक बाइक सवार की मौत हो गयी।

एनएचआईडीसीएल ने जेसीबी लगा कर दो घंटे की मशक्कत के बाद हाइवे खोल दिया था लेकिन छह बजे के लगभग फिर से पहाड़ी का एक हिस्सा सड़क पर आ गिरा। बदरीनाथ धाम जाने वाले लगभग दस हजार यात्रियों को पुलिस प्रशासन ने रोक दिया है। इन यात्रियों को जोशीमठ, हेलंग, पाखी, पीपलकोटी और चमोली में भेज दिया गया है।

यमुनोत्री हाइवे पर किसाला के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण हाइवे दो घंटे तक बंद रहा। जिसकारण यमुनोत्री जाने वाले तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुबह के समय आये बोल्डर को जेसीबी से हटा कर दस बजे के लगभग हाइवे को खोल दिया गया और यात्रा शुरू करवाई।

इन इलाकों में होने वाले भूस्खलनों का पहले से पता लगाया जा सकता है अथवा नहीं, इस बारे में भी माउंट एवरेस्ट के शोर से लगाने की कोशिश की जा रही है। इतना पता है कि पहाड़ों के ऊपर जमी बर्फ के पिघलने और नीचे आने की वजह से ही मिट्टी और पत्थर नीचे खिसक जाते हैं।