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पंचायत चुनाव से पहले केंद्र के फैसले से ही लगा भाजपा को झटका

  • भाजपा ने प्रारंभ से इस योजना की आलोचना की थी

  • अब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के हाथों ईनाम मिलेगा

  • केंद्र ने इस योजना के दावों का सत्यापन किया

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः राजनीतिक विवाद चरम पर होने के बाद भी ममता बनर्जी की एक कल्याणकारी योजना का लोहा अब मोदी सरकार ने भी मान लिया है। आगामी सात जनवरी को दिल्ली के विज्ञान भवन में पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों को यह पुरस्कार खुद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू प्रदान करेंगी।

इसे स्थानीय स्तर पर ममता सरकार की एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल जिस दुआरे सरकार यानी दरवाजे पर सरकार की निरंतर आलोचना भाजपा के द्वारा की गयी थी, उसी योजना को यह पुरस्कार प्राप्त हुआ है। यह योजना खुद ममता बनर्जी के दिमाग की उपज है।

यह एलान तब हुआ है जबकि केंद्र सरकार ने कई योजनाओं की राशि देने से इंकार कर दिया है। केंद्र सरकार के इस फैसले की जानकारी कोलकाता तक पहुंची है। इस सूचना पर राज्य सरकार के अधिकारी भी प्रसन्न हैं क्योंकि भीषण मतभेद के बीच भी मोदी सरकार को इस राज्य की चर्चित योजना की उपलब्धियों को स्वीकार करना पड़ा है।

केंद्र के एलान के मुताबिक दुआरे सरकार को केंद्र सरकार का डिजीटल पुरस्कार प्राप्त होने जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंक विधानसभा चुनाव के पहले से ही भाजपा और तृणमूल के बीच जो राजनीतिक विवाद लगा हुआ है, उसके बीच यहां के किसी योजना को ईनाम मिलने की उम्मीद किसी को नहीं थी।

दूसरी तरफ इस दुआरे सरकार को ईनाम मिलने की वजह से पंचायत चुनाव में भी भाजपा को नये सिरे से इस एक योजना की आलोचना करने का मौका भी अब नहीं मिल पायेगा। वरना इससे पूर्व पूरे प्रदेश में भाजपा ने हर मौके पर इस योजना का न सिर्फ विरोध किया है बल्कि ममता सरकार पर केंद्र की योजनाओं का नाम बदलकर लाभ उठाने का आरोप भी लगाया है।

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को उल्लेखनीय सफलता मिली थी। उसके बाद टीएमसी ने अपने सलाहकार प्रशांत किशोर की मदद से नई योजना का एलान किया था। इसमें अनेक सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों को उनके घरों तक यानी घर पहुंच सेवा क तहत देने का एलान किया गया था।

इसका काम लगातार जारी रहने के बाद ही भाजपा लगातार इसकी विफलता के दावे करती आयी है। राज्य सरकार की तरफ से पांच बार इस योजना को चलाया गया है। इसके तहत राज्य के छह करोड़ साठ लाख लोगों तक इसका लाभ पहुंचाया गया है। राज्य सरकार ने इस उपलब्धि का आंकड़ा भी केंद्र को भेजा था। इन्हीं आंकड़ों का परीक्षण कर केंद्र ने पश्चिम बंगाल की इस योजना को ईनाम देने का फैसला लिया है। इसके तहत राज्य में चलाये गये तीन लाख 61 हजार शिविरों के आंकड़ों का भौतिक परीक्षण करने के बाद ही ईनाम देने का निर्णय हुआ है।