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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, दो गुटों के बीच गोलीबारी में 4 की मौत

हिंसा से बचने गांव छोड़कर भागे अनेक लोग

ताओदाइजिंग गांव में हुई यह भिड़ंत

दोनों ही उग्रवादी गुट माने जाते हैं

एसओपी तुरंत रद्द करने की मांग उठी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में नोनेय जिले के ताओदाइजिंग गांव में दो विरोधी नागा उग्रवादी गुटों के बीच भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें कम से कम चार उग्रवादी मारे गए। इस हिंसक झड़प के बाद पूरे इलाके में भारी दहशत फैल गई और ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मारे गए कैडरों में तीन जेलियानग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (जेडयूएफ-जे) और एक नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (एनएससीएन-आईएम) से जुड़ा हुआ था। इस गोलीबारी की घटना के बाद स्थानीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है और रोंगमेई नागा लुफुआम ने सशस्त्र गुटों से आपसी शत्रुता समाप्त करने की अपील की है।

इस आंतरिक संघर्ष और राज्य में जारी लगातार तनाव के बीच, यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) के तत्वावधान में तंगखुल नागा लॉन्ग (टीएनएल) और अन्य नागा नागरिक संगठनों ने मणिपुर के उखरुल तथा कामजोंग जिलों में एक विशाल पीपुल्स रैली का आयोजन किया।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान नागा समूहों ने मणिपुर संकट के एक स्थायी और सम्मानजनक राजनीतिक समाधान की पुरजोर मांग की। उनका मुख्य फोकस नागा बहुल क्षेत्रों से असम राइफल्स को तुरंत हटाकर वहां सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जैसे किसी तटस्थ केंद्रीय बल को तैनात करने पर रहा, क्योंकि उनका आरोप है कि असम राइफल्स वर्तमान संकट में अपनी निष्पक्ष भूमिका निभाने में विफल रही है।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कुकी उग्रवादी समूहों के बीच हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते को तुरंत रद्द करने की भी मांग की है। उनका यह भी आरोप है कि इस समझौते की आड़ में कुकी उग्रवादी नागा समुदायों के खिलाफ हिंसा और उकसावे की कार्रवाई को बढ़ावा दे रहे हैं।

इसके साथ ही, रैली में शामिल लोगों ने राज्य में जारी कथित छद्म युद्ध और हथियारों की अवैध आपूर्ति को तुरंत रोकने की सख्त मांग उठाई। इस प्रदर्शन के दौरान कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली राज्य की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को उनके पद से हटाने की मांग भी जोर-शोर से की गई।

यह बड़ा विरोध प्रदर्शन इंफाल-उखरुल राजमार्ग पर यात्री वाहनों पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी की घटना के ठीक अगले दिन आयोजित किया गया था। इस व्यापक विरोध के कारण उखरुल और कामजोंग जिलों में दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, निजी संस्थान और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप रहे, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

नागा नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक केंद्र सरकार शांति बहाली, क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा और नागाओं की राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनके ये लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे।