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दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति में सुधार अब तीन महीने बाद

शीर्ष आईटी अधिकारी पर निगरानी की पुष्टि की

  • इसी शाखा पर लगा है सारे आरोप

  • ईसीआईनेट का संचालन विवादों में

  • असली नियंत्रण सीमा खन्ना के पास

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कार्य आवंटन में बदलाव को लेकर अधिकारियों के बीच उत्पन्न विवाद के तीन महीने बाद, चुनाव आयोग ने बुधवार को एक नया आदेश जारी किया। इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों की चिंता के बाद कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन के समक्ष यह मामला उठाया गया था। नए आदेश में महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना के काम पर वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी की परत को फिर से लागू और स्पष्ट किया गया है। 28 जुलाई के पिछले आदेश में इस निगरानी को हटा दिया गया था, जिसे आयोग के अनुसार 30 जुलाई के फैसले के बाद कभी लागू ही नहीं किया गया।

आयोग द्वारा बुधवार को जारी कार्यालय आदेश में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा को आईटी/आईसीटी का प्रभार सौंपा गया है। सीमा खन्ना के संबंध में आदेश में कहा गया है कि वे संबंधित कार्यात्मक प्रभागों की फाइलें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (पीकेएस) के माध्यम से ही प्रस्तुत करेंगी।

28 जुलाई का विवादित आदेश और उसकी पृष्ठभूमि 28 जुलाई के आदेश में आईटी और आईसीटी विषयों को तत्कालीन उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार के कार्य आवंटन से हटाकर केवल सीमा खन्ना के नाम के आगे दर्ज किया गया था। इससे यह स्पष्ट हो गया था कि वे उप चुनाव आयुक्त के बजाय सीधे आयोग को रिपोर्ट करेंगी।

चुनाव आयोग का आईटी प्रभाग ईसीआईनेट और ईरोनेट का संचालन करता है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने आंतरिक नोट में उल्लेख किया था कि ज़मीनी अधिकारियों ने ईरोनेट तक उचित पहुँच न मिलने और इसके परिणामस्वरूप मतदाता सूचियों के केंद्रीकरण की शिकायत की थी। इसके बाद 29 जुलाई को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर सूचित किया कि वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने यह आदेश आयोग की मंजूरी के बिना जारी किया था।

प्रशासनिक स्पष्टीकरण और वास्तविक स्थिति 28 जुलाई के आदेश में अब तक कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था, लेकिन आयोग का कहना है कि दोनों आयुक्तों की चिंताओं के बाद इसे कभी लागू नहीं किया गया। वास्तव में, सीमा खन्ना वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त गर्ग के माध्यम से ही फाइलें भेजती रहीं, जो अगस्त में संजय कुमार के जाने के बाद लिंक अधिकारी के रूप में आईटी का प्रभार संभाल रहे थे। एक चुनाव आयोग सूत्र ने बताया कि नया कार्य आवंटन आदेश आयोग के सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के अनुसार है। महानिदेशक (आईटी) के रिपोर्टिंग ढांचे में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वे हमेशा की तरह उप चुनाव आयुक्त स्तर के अधिकारी को ही रिपोर्ट करती रहेंगी।

कैबिनेट सचिव को पत्र और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा 30 जुलाई के एक आंतरिक नोट में संधू और जोशी ने स्पष्ट किया था कि जब तक आयोग में सहमति नहीं बनती, 23 सितंबर 2025 का पुराना कार्य आवंटन ही लागू रहेगा। 26 सितंबर के एक प्रेस नोट में आयोग ने कहा था कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग के किसी नीतिगत या आईटी प्रभाग के मामले से नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।

26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में चुनाव आयोग ने कहा कि दोनों आयुक्तों के 30 जुलाई 2026 के संयुक्त निर्देश के कारण 28 जुलाई 2026 का आदेश कभी लागू नहीं हुआ। जोशी ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र में यह भी आरोप लगाया था कि गर्ग ने वह आदेश बिना स्वीकृति के जारी किया था और मांगने पर संबंधित फाइलें भी उपलब्ध नहीं कराई थीं।

नए अधिकारियों का कार्य आवंटन आईटी प्रभाग के कार्य आवंटन में बदलाव के अलावा, बुधवार के आदेश में हाल ही में नियुक्त उप चुनाव आयुक्त प्रकाश राजपुरोहित के कार्यों को भी शामिल किया गया। उन्हें चुनाव योजना, आदर्श आचार संहिता और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण प्रभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि चुनाव योजना के मामलों में वे वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग का सहयोग करेंगे।