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राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ बर्खास्त किये गये

अवैध फोन टैपिंग का मामला चर्चा में आने पर कार्रवाई

अवैध जासूसी का गंभीर आरोप लगा है

प्रमाणित हुआ तो यह देशद्रोह भी होगा

अनेक लोगों के फोन टैप कराये गये थे

जकार्ताः दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने एक अभूतपूर्व और कड़ा कदम उठाते हुए अपने चीफ ऑफ स्टाफ लिस्टियो सिगिट प्रबोवो को तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त कर दिया। इंडोनेशियाई सरकार के उच्च अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति और कैबिनेट के कई प्रमुख मंत्रियों के फोन कॉल गैर-कानूनी तरीके से टैप करने की यह कथित खुफिया साजिश बेहद गंभीर है और यह सीधे तौर पर देशद्रोह की श्रेणी में आ सकती है।

बुधवार को राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा इस सनसनीखेज फैसले का आधिकारिक बयान जारी किए जाने से ठीक एक दिन पहले, पुलिस बल ने कार्रवाई करते हुए पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ और उनके साथ शामिल दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को धर दबोचा।

इंडोनेशिया के स्थानीय समाचार माध्यमों के अनुसार, इस पूरे मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों में इंडोनेशियाई राष्ट्रीय पुलिस के कानूनी विभाग के प्रमुख अहरी सोंटा नासुशन भी शामिल हैं।

मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति के आधिकारिक प्रवक्ता प्रसेत्यो हादी ने मीडिया को बताया कि यह कृत्य पूरी तरह गैर-कानूनी, असंवैधानिक और कुछ भ्रष्ट प्रशासनिक तत्वों द्वारा व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए किया गया था।

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियां सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा, राज्य के मूलभूत हितों और देश के शीर्ष नेतृत्व की शारीरिक व रणनीतिक सुरक्षा को गंभीर खतरे में डालती हैं।

प्रारंभिक जांच रिपोर्टों के अनुसार, यह अनधिकृत फोन टैपिंग नेटवर्क पिछले साल से लेकर इस साल के दौरान लगातार संचालित किया जा रहा था।

यह वह समय था जब लिस्टियो सिगिट प्रबोवो राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख के सबसे शक्तिशाली पद पर तैनात थे। आरोपी अधिकारियों पर केवल अवैध निगरानी का ही आरोप नहीं है, बल्कि उन पर यह भी गंभीर आरोप दर्ज किया गया है कि उन्होंने पिछले महीने अपने इस काले कारनामे का पर्दाफाश होने से बचने के लिए इंटरसेप्ट किए गए गुप्त कॉल रिकॉर्ड्स, डेटा फाइल्स और डिजिटल सबूतों को तुरंत नष्ट और डिलीट करने के विभागीय आदेश दिए थे।

इंडोनेशिया के वरिष्ठ कानून मंत्री युसरिल इहजा महेंद्रा ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इतनी उच्च स्तरीय टैपिंग और जासूसी के पीछे का असली छिपा हुआ मकसद क्या था—क्या यह कोई तख्तापलट की साजिश थी या राजनीतिक ब्लैकमेलिंग का जरिया—यह अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है और इसकी गहन जांच जारी है।

इस बीच, राजधानी में किसी भी संभावित विरोध, उपद्रव या तख्तापलट की स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंडोनेशियाई सशस्त्र बलों ने बुधवार को ही जकार्ता की सड़कों पर 20,000 से अधिक हथियारों से लैस अतिरिक्त सैनिकों को तैनात कर दिया है।