साइक्लोन मुरासु अब तेजी से ताकत खो रहा है
व्यापक इलाके में फसल की बर्बादी हुई
किनारे लगे नाव भी इसमें नष्ट हो गये
एकसौ बीस किलोमीटर तक इसकी रफ्तार
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः साइक्लोन मुरासु ने मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दस्तक दी, जिससे 15 जिलों में 30,661 एकड़ में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा, हजारों पेड़ उखड़ गए, सैकड़ों बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए और मछली पकड़ने की नावें तबाह हो गईं। कई इलाके जलमग्न हो गए। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, कृष्णा, बापटला और नंद्याल जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। धान, कपास और मक्के की फसलों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है। 15 जिलों के 132 मंडलों पर चक्रवात का गहरा असर पड़ा है।
मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि तूफान का मुख्य केंद्र सुबह 5:30 बजे तक तट को पार कर चुका था, जबकि इसका पिछला हिस्सा तब भी टकरा रहा था। राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन फंसे रहे और कम दृश्यता (विजिबिलिटी) के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि गंभीर चक्रवाती तूफान ने नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के पास तड़के 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच तट पार किया। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किमी प्रति घंटा थी, जो बढ़कर 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंच रही थी। लैंडफॉल की प्रक्रिया तड़के लगभग 1 बजे शुरू हो गई थी।
सुबह 8:30 बजे, पिछले छह घंटों में 8 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने के बाद तूफान दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर स्थित था। विशाखापत्तनम में चक्रवात चेतावनी केंद्र ने इसे ओंगोल से 30 किमी उत्तर से उत्तर-पूर्व, बापटला से 40 किमी दक्षिण-पश्चिम, कावली से 90 किमी उत्तर से उत्तर-पूर्व, विजयवाड़ा से 100 किमी दक्षिण से दक्षिण-पश्चिम और मछलीपट्टनम से 120 किमी पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम में केंद्रित बताया।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि 10,805 लोगों को चक्रवात आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया गया। राज्य सरकार ने 171 राहत शिविर स्थापित किए और 14,810 भोजन के पैकेट बांटे। राहत कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 11 टीमों और राज्य आपदा मोचन बल की 13 टीमों को 613 जनरेटरों के साथ तैनात किया गया। अग्निशमन विभाग ने उखड़े हुए पेड़ों को हटाने और भरे पानी को निकालने के लिए 185 टीमें भेजीं। सोमवार सुबह 8:30 बजे से 24 घंटों में बापटला में सर्वाधिक 222.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा नरसपुर में 198.6 मिमी, ओंगोल में 120.2 मिमी और मछलीपट्टनम में 83.9 मिमी बारिश दर्ज की गई।
प्रकाशम जिले के कोथापटनम के एक मछुआरे कृष्णम्मा ने बताया कि 14 वर्षों में यह उनके द्वारा देखा गया सबसे खतरनाक चक्रवात था। उन्होंने बताया कि उनके गांव से लगभग 400 परिवारों को सुरक्षित निकाला गया, जिसमें एनडीआरएफ की टीमों ने मदद की। हालांकि, उन्हें अभी तक अपनी नावों की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।