Breaking News in Hindi

दशहरा के बाद बिहार में प्रशासनिक और पुलिस महकमे में बड़ा बदलाव

अति महत्वाकांक्षी को डीजीपी बनाने से परहेज रहेगा

नये मुख्य सचिव की भी चर्चा प्रारंभ

कई परस्परविरोध समीकरण उभरे है

वरीयता या पकड़ पर रस्साकशी तेज

दीपक नौरंगी

पटनाः  बिहार के प्रशासनिक और पुलिसिया गलियारों में दशहरा के ठीक बाद एक व्यापक प्रशासनिक फेरबदल की मजबूत जमीन तैयार हो चुकी है। राज्य को नया मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक मिलने वाला है, जिससे शीर्ष कुर्सी से लेकर डीआईजी और एसपी स्तर तक के अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। वर्तमान में राज्य के नए पुलिस मुखिया की ताजपोशी को लेकर दो परस्पर विरोधी समीकरण उभरकर सामने आए हैं।

पहला समीकरण (वरिष्ठता और संतुलन): इस विकल्प के तहत सरकार संघ लोक सेवा आयोग की गाइडलाइन, वरिष्ठता और विवादरहित प्रशासनिक संतुलन को तरजीह दे सकती है। इस फेहरिस्त में 1991 बैच की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा, 1992 बैच के भृगु श्रीनिवासन और 1993 बैच के जितेंद्र सिंह गंगवार का नाम सबसे आगे चल रहा है। प्रीता वर्मा वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर हैं, जबकि भृगु श्रीनिवासन अपनी शांत कार्यशैली और जितेंद्र सिंह गंगवार कानून-व्यवस्था के लंबे अनुभव के चलते मजबूत दावेदार हैं।

दूसरा समीकरण (सख्त छवि और लॉबी): यह समीकरण 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन के इर्द-गिर्द घूमता है, जो वर्तमान में एसटीएफ और विशेष शाखा में मजबूत पकड़ रखते हैं। अपराध नियंत्रण और फील्ड पुलिसिंग में उनकी सख्त छवि के कारण एक प्रभावशाली लॉबी उन्हें डीजीपी के रूप में देखना चाहती है। हालांकि, इसमें वरिष्ठता और समय का पेंच फंसा हुआ है।

इस गतिरोध को सुलझाने के लिए एक बीच का रास्ता यह निकाला जा सकता है कि कुछ महीनों के लिए प्रीता वर्मा को अंतरिम डीजीपी बनाया जाए, जिससे बाद में कुंदन कृष्णन के लिए रास्ता साफ हो सके। दूसरी ओर, मुख्य सचिव की कुर्सी को लेकर भी आईएएस लॉबी में जबर्दस्त रस्साकशी चल रही है।

शीर्ष स्तर पर जारी इस खींचतान का सीधा असर पुलिस मुख्यालय के कामकाज पर भी दिखने लगा है। सिपाही से लेकर डीएसपी रैंक तक के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन की फाइलें मुख्यालय स्तर पर अटकी हुई हैं, जिससे निचले संवर्ग में गहरा असमंजस बना हुआ है। अब दशहरे के तुरंत बाद होने वाले इस बड़े फेरबदल से ही यह साफ हो पाएगा कि सरकार वरिष्ठता के स्थापित फॉर्मूले पर मुहर लगाती है या किसी विशेष रणनीति को चुनती है।