तीन उग्रवादी गिरफ्तार, वसूली के मामलों में थे वांछित
दो जिलों के आठ गांव गांवे में घर ढाहे गये
मेघालय बॉर्डर के फ्यूल स्टेशन पर भूस्खलन
अरुणाचल में उल्फा (आई) के दो उग्रवादी गिरफ्तार
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी : हाल ही में उत्तर-पूर्व भारत के विभिन्न राज्यों से सुरक्षा, विस्थापन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील खबरें सामने आई हैं। मणिपुर के नोनी, तमेंगलोंग और कांगपोकपी जिलों के आठ गांवों में कई घरों के ढह जाने के कारण 200 से अधिक नागा परिवार पूरी तरह विस्थापित हो चुके हैं।
इस संबंध में ज़ेलियानग्रोंग सिविल ऑर्गेनाइजेशन के पूर्व और वरिष्ठ नेताओं के फोरम ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर विस्थापित परिवारों को आधिकारिक रूप से आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (के रूप में मान्यता देने और मानक राहत लाभ प्रदान करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, मंच ने राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (इंफाल-जिरीबाम गलियारे) पर सुरक्षा बढ़ाने और अंतर-जिला सीमा विवादों को हल करने की भी मांग की है।
एक अन्य घटना में, मणिपुर में सुरक्षा बलों और पुलिस ने अलग-अलग अभियानों में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े तीन सक्रिय सदस्यों को वसूली की गतिविधियों में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पीआरई-पौक (प्रो) और यूएनएलएफ (पामबेई समूह) के कैडर शामिल हैं, जिनसे सुरक्षा एजेंसियां लगातार पूछताछ कर रही हैं।
उधर, असम-मेघालय बॉर्डर के पास जोरबात के टेन माइल इलाके में भारी भूस्खलन की एक घटना सामने आई, जहां पहाड़ी का एक हिस्सा ढहने से मलबे की चपेट में आने से एक फ्यूल स्टेशन का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है।
इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश की रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मियाओ-विजयनगर रोड पर आईईडी धमाका करने की योजना बना रहे उल्फा (आई) के दो संदिग्ध सदस्यों को असम राइफल्स ने चांगलांग और तिनसुकिया पुलिस के साथ एक संयुक्त अभियान में भारी मात्रा में हथियारों और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया है, जिससे एक बड़े सुरक्षा खतरे को टाल दिया गया है।