पशुओं पर तीन तरफा ईलाज से मिली है कामयाबी
ओरेगन विश्वविद्यालय में किया यह शोध
नवजात प्राइमेटस पर यह परीक्षण सफल रहा
अब इंसानी क्लीनिकल ट्रायलों की तैयारी जारी
राष्ट्रीय खबर
रांचीः दुनिया भर में हर साल 1,20,000 से अधिक नवजात शिशु एचआईवी से संक्रमित हो जाते हैं। अब तक एचआईवी के साथ जीने वाले लाखों लोगों के लिए, संक्रमण को नियंत्रित रखने का एकमात्र तरीका जीवन भर दवाएं लेना रहा है, बशर्ते ये दवाएं सुलभ और किफायती हों। लेकिन ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया एक नया अध्ययन इस दिशा में एक क्रांतिकारी और बिल्कुल अलग दृष्टिकोण पेश करता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जन्म के तीन दिनों के भीतर नवजात शिशुओं को दी गई तीन उपचारों की एक संयुक्त थेरेपी शरीर से एचआईवी को स्थायी रूप से खत्म कर सकती है। शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग के लिए नवजात मानवेतर प्रजातियों (प्राइमेट्स) पर परीक्षण किया, जो शारीरिक संरचना में मनुष्यों के काफी समान होते हैं।
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तीन उपचारों का शक्तिशाली संयोजन इस शोध में तीन अलग-अलग चिकित्सीय विधियों का एक साथ उपयोग किया गया: न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज: जो रक्त में घूम रहे वायरस को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करती हैं। मानक एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी जो वायरस के प्रतिकृति बनाने की क्षमता को कम करती है। लिरोनलिमैब एक प्रयोगात्मक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जो एचआईवी को प्रतिरक्षा कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकती है।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि यद्यपि इन तीनों विधियों का व्यक्तिगत रूप से परीक्षण पहले भी किया गया था, लेकिन इनमें से कोई भी अकेले वायरस को पूरी तरह समाप्त करने में सफल नहीं रही थी। शोधकर्ताओं, जोना साचा और नैन्सी हेगवुड के अनुसार, जब इन तीनों को एक साथ मिलाया गया, तो उनका प्रभाव आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गया। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है: एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी नल बंद करने जैसा काम करती है, न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज पानी साफ करती हैं, और लिरोनलिमैब उस कमरे को वाटर-टाइट सील कर देता है ताकि वायरस दोबारा प्रवेश न कर सके।
भविष्य की संभावनाएं यह शोध एचआईवी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक नई उम्मीद है, जो हर साल लगभग 6,00,000 लोगों की जान ले लेती है। हालांकि अभी इसे मानव क्लीनिकल परीक्षणों से गुजरना होगा, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक एचआईवी के खात्मे की दिशा में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। वर्तमान में, वैज्ञानिकों का अगला लक्ष्य यह पता लगाना है कि संक्रमण के कितने समय बाद तक यह उपचार प्रभावी बना रहता है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एचआईवी-मुक्त भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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