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यूक्रेन युद्ध को देख राफेल ने अपने विमानों में सुधार किया

अब विमान में सस्ता ड्रोन नाशक रॉकेट जुड़ा

एजेंसियां

पेरिसः फ्रांस ने अपने राफेल लड़ाकू विमान से लेजर-निर्देशित रॉकेटों का सफल लाइव-फायर परीक्षण किया है, जिससे इस अत्याधुनिक लड़ाकू जेट को बेहद कम लागत वाली एंटी-ड्रोन मारक क्षमता हासिल हो गई है। अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के बाद फ्रांस का यह कदम आधुनिक हवाई युद्ध में बदलती रणनीतियों को दर्शाता है। वैश्विक वायु सेनाएं अब इस बात को गहराई से समझ रही हैं कि हर छोटे खतरे से निपटने के लिए बेहद महंगे मिसाइलों पर निर्भर रहने के बजाय उन्हें बहुस्तरीय और किफायती इंटरसेप्ट (मार गिराने वाले) विकल्पों की आवश्यकता है।

फ्रांसीसी सरकारी रक्षा खरीद और प्रौद्योगिकी एजेंसी डीजीए ने घोषणा की कि राफेल जेट पर 68 मिमी के लेजर-निर्देशित रॉकेटों को सफलतापूर्वक एकीकृत कर लिया गया है। इस परियोजना पर काम पिछले साल दिसंबर में तत्काल आवश्यकता के तहत शुरू हुआ था, जिसके व्यावहारिक परीक्षण इस साल फरवरी में आयोजित किए गए। लादाक (एंटी-ड्रोन कैपेबिलिटी फॉर कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के नाम से जाने जाने वाले इस कार्यक्रम को डसॉल्ट एविएशन और थेल्स के सहयोग से विकसित किया गया है। वर्तमान में यह तकनीक फ्रांसीसी वायु और नौसेना के राफेल विमानों के लिए है, लेकिन भविष्य में इसे अन्य निर्यातक देशों के राफेल और लड़ाकू जेट विमानों को भी प्रदान किया जा सकता है।

इस नई प्रणाली की आवश्यकता तब महसूस हुई जब फ्रांसीसी वायुसेना प्रमुख जनरल जेरोम बेलेंजर ने संसद में कहा था कि ईरानी शाहिद-136 और रूसी गेरान जैसे लंबी दूरी के आत्मघाती हमलों वाले ड्रोनों को मार गिराने के लिए राफेल और मिराज 2000D विमानों को लेजर-निर्देशित रॉकेटों से लैस करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया था, कुछ हजार डॉलर मूल्य के ड्रोन को मार गिराने के लिए 10 लाख यूरो (लगभग 9 करोड़ रुपये) से अधिक की कीमत वाली माइका हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का उपयोग करना व्यावहारिक और टिकाऊ नहीं है।

इस समस्या के समाधान के रूप में 68 मिमी के लेजर-निर्देशित रॉकेटों को अपनाया गया है, जिन्हें थेल्स टेलसन जेएफ 12 रॉकेट पॉड में लोड किया जाता है। यह प्रणाली राफेल के उन्नत आरबीई 2 रडार और टैलियोस ट्रैकिंग पॉड के साथ मिलकर काम करती है।

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात की हवाई सीमा की रक्षा के लिए चलाए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान फ्रांसीसी राफेल विमानों को ईरानी ड्रोनों से निपटने के लिए महज कुछ हफ्तों में दर्जनों कीमती माइका मिसाइलें दागनी पड़ी थीं, लेकिन अब इस नए सस्ते रॉकेट की मदद से फ्रांस बेहद कम खर्च में हवाई खतरों और ड्रोनों का खात्मा करने में सक्षम हो गया है।