सीजेपी के आंदोलन के तीन सप्ताह बीत चुके हैं
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वजन अब तक 8.2 किलोग्राम कम हो चुका है, जबकि उनका ब्लड ग्लूकोज स्तर गिरकर 67 पर आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को यह जानकारी दी। इसी बीच, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए राहुल गांधी से भी इसमें शामिल होने की अपील की है।
सीजेपी के अनुसार, वांगचुक के अनिश्चितकालीन उपवास के 16वें दिन उनके स्वास्थ्य में और गिरावट दर्ज की गई है। उनका रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) 107/70 रिकॉर्ड किया गया। परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सीजेपी का यह विरोध प्रदर्शन 25वें दिन में प्रवेश कर गया।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे को अहंकार की लड़ाई न बनाए और प्रदर्शनकारियों की मांगों का समाधान करे। दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 16वां दिन है। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इसे अहंकार की लड़ाई न बनाएं क्योंकि यहाँ इंसानी जिंदगी दांव पर लगी है। उन्होंने आगे कहा, अपनी गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता, जवाबदेही और सुधार की इच्छा का प्रतीक है। हम केवल जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन का समर्थन करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को बिना किसी राजनीतिक झंडे के सीजेपी के इस प्रदर्शन का समर्थन करना चाहिए। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी इस आंदोलन को समर्थन देना चाहिए। ठाकरे ने कहा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांगना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने वांगचुक से भूख हड़ताल वापस लेने की अपील करते हुए कहा कि उनका जीवन देश के लिए अमूल्य है, क्योंकि ऐसा लगता है कि सरकार को इस आंदोलन की कोई परवाह नहीं है।
ठाकरे ने घोषणा की कि जब 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सीजेपी संसद मार्च निकालेगी, तब शिवसेना (यूबीटी) भी इसके समर्थन में महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सांसद मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बीजेपी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वांगचुक की भूख हड़ताल के बावजूद सरकार लगातार उदासीनता और बेरुखी दिखा रही है।