सीपीआई के महासचिव डी राजा ने प्रेस कांफ्रेस में सवाल किया
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने अयोध्या के राम मंदिर में एकत्रित किए गए दान के पैसों की कथित हेराफेरी के मामले में न्यायिक जांच की अपनी मांग को दोहराया है। इसके साथ ही पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाबदेही मांगी है।
संसद के मानसून सत्र (जो 20 जुलाई से शुरू होने वाला है) से पहले यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीपीआई के महासचिव डी. राजा ने कहा कि केंद्र सरकार ने जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात किया है और इस मामले में सिर्फ इस्तीफों से काम नहीं चलेगा।
उन्होंने कहा, वास्तव में, ट्रस्ट (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट) ने खुद को बदनाम किया है। ट्रस्ट ने लोगों के भरोसे को तोड़ा है। यह ट्रस्ट अब अविश्वसनीय हो चुका है। मगर मिस्टर मोदी चुप हैं। उन्होंने अब तक इस पर एक शब्द भी नहीं बोला है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया है। 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार से कथित चोरी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए बयानों का हवाला देते हुए, डी. राजा ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री अब इस मामले पर मौन क्यों हैं?
उन्होंने आगे कहा, हमारी पार्टी शुरुआत से ही मांग कर रही है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। यह जांच पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। केवल इस्तीफे दे देना इस समस्या का समाधान नहीं है।
इसके साथ ही, सीपीआई नेता ने एक देशव्यापी अभियान की भी घोषणा की। इस अभियान के तहत पार्टी विभिन्न राज्यों में पदयात्राएं और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करेगी, ताकि मोदी सरकार की उन विफलताओं को उजागर किया जा सके जो आजीविका, बेरोजगारी, ग्रामीण संकट और मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों व महिलाओं की चिंताओं से जुड़ी हैं। डी. राजा ने बताया कि इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन का समापन 1 सितंबर को दिल्ली में एक विशाल रैली के साथ होगा।