राम मंदिर दान चोरी की जांच में नये नये तथ्य जुड़े
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कई लोग अचानक अमीर हो गये हैं
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गबन के मास्टरमाइंड की तलाश जारी
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सीसीटीवी में पैसों की चोरी नजर आयी
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः राम मंदिर दान में हुई कथित अनियमितताओं की जांच का दायरा अब और बढ़ गया है। पुलिस का पूरा ध्यान अब उस धन का पता लगाने पर है, जिसे गिरफ्तार किए गए आरोपियों द्वारा कथित तौर पर गबन किया गया है। जांच अधिकारी इस समय फैजाबाद जेल में बंद आठ आरोपियों के ठिकानों की खाक छान रहे हैं। वे इस बात के सबूत तलाश रहे हैं कि फंड की कथित हेराफेरी की अवधि के दौरान आरोपियों ने कौन-सी चल और अचल संपत्तियां बनाईं। पुलिस ने अब तक 80 लाख रुपये नकद, संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और आरोपियों द्वारा खरीदी गई एक ब्रेज़ा कार जब्त की है। इनमें कई लोग ऐसे हैं तो आमदनी के लिहाज से हाल के दिनों में काफी अधिक संपत्ति अर्जित कर चुके हैं।
जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया, यह माना जा रहा है कि मामले में आरोपियों की संलिप्तता स्थापित हो चुकी है, लेकिन उनके द्वारा ठगे गए बाकी पैसे का ठिकाना अभी पता चलना बाकी है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि इस पूरे गबन के पीछे मास्टरमाइंड कौन था और कुल कितनी रकम चुराई गई है।
पुलिस ने घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की भी जांच की है, जिसमें पिछले 45 दिनों की रिकॉर्डिंग शामिल है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, हमारे पास 45 दिनों की फुटेज है, जिसमें आरोपी मौका मिलते ही पैसे निकालते दिख रहे हैं। किसी भी दिन चोरी की रकम तय नहीं होती थी। संपत्तियों की हालिया खरीद-फरोख्त का पता लगाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड और स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों से भी संपर्क किया जा रहा है। आरोपियों के मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि डिजिटल सबूतों से वित्तीय लेनदेन और बातचीत के नए सुराग मिल सकें।
पुलिस के निष्कर्षों के अनुसार, धन की यह हेराफेरी साल 2021 से चल रही थी, जब देवताओं को राम जन्मभूमि परिसर में एक अस्थायी फाइबरग्लास संरचना में स्थानांतरित किया गया था। राम मंदिर के उद्घाटन के बाद, साल 2025 के महाकुंभ के दौरान बड़ी मात्रा में पैसा चोरी होने की आशंका है, जब श्रद्धालुओं की भीड़ अचानक बहुत बढ़ गई थी। इस दौरान दान पात्रों में आने वाले कैश को गिनने के लिए अधिक लोगों को तैनात किया गया था।
इस बीच, माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्र से अपने उस रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है, जिसमें कहा गया था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस ट्रस्ट पर जनता का अटूट विश्वास है, उसे पारदर्शिता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को भी बनाए रखना चाहिए।