नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ या नक्सली सोच वाला नहीं कहा था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए रिजिजू ने उन श्रेणियों और प्रवृत्तियों की सूची प्रस्तुत की, जिनका उल्लेख प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए किया था।
📋 किरेन रिजिजू ने समझाई ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा, साझा की विस्तृत सूची
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री के बयान का गलत अर्थ निकालकर राजनीति की जा रही है। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता की व्याख्या करते हुए निम्नलिखित बिंदु सामने रखे:
-
माओवादियों के समर्थक: जो लोग हिंसक माओवादियों की गतिविधियों को उचित ठहराते हैं और भारतीय संविधान व कानून को स्वीकार नहीं करते।
-
अलगाववाद और अनुच्छेद 370: जो तत्व देशविरोधी अलगाववादियों के साथ खड़े दिखाई देते हैं और अनुच्छेद 370 का खुला समर्थन करते हैं।
-
देश की संप्रभुता पर प्रहार: जो लोग पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) को शेष भारत से अलग करने के लिए ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को काटने और देश के टुकड़े करने की मंशा रखते हैं।
🎤 लाल किले से क्या बोले थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैचारिक माओवाद पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी:
-
संस्थानों पर प्रभाव: दशकों तक माओवादी सोच रखने वाले लोग सार्वजनिक जीवन और सरकारी कमेटियों का हिस्सा बनकर देश की प्रगतिशील नीतियों को प्रभावित करते रहे।
-
हथियारबंद नक्सलवाद पर नियंत्रण: सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और दृढ़ नीति से देश को बंदूकधारी व हथियारबंद नक्सलियों से मुक्त कराने में ऐतिहासिक सफलता मिली है।
-
वैचारिक नक्सलवाद की पहचान: भले ही भौतिक रूप से नक्सली कमजोर हुए हों, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ समाज को भ्रमित करने और हिंसा भड़काने के नए रास्ते खोज रहे हैं।
-
अलगाव की आवश्यकता: एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए युवाओं को जागरूक कर ऐसी विघटनकारी सोच वाले तत्वों को पहचानकर अलग-थलग करना जरूरी है।
💬 कांग्रेस नेताओं का विरोध: चिदंबरम का ट्वीट और जयराम रमेश का सवाल
प्रधानमंत्री के इस संबोधन के बाद विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी:
-
पी. चिदंबरम: पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।’
-
जयराम रमेश: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पूर्व में ‘अर्बन नक्सल’ शब्द पर संसद में सवाल पूछे जाने पर गृह मंत्रालय ने कहा था कि इसकी कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब लाल किले से राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए ‘मेंटल नक्सल’ और ‘आइडियोलॉजिकल नक्सल’ जैसे शब्दों का सहारा लिया जा रहा है।