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हंस चुगेगा दाना और कौवा मोती खाएगा.. .. .. ..

कहते हैं कि भक्ति में असीम शक्ति होती है, लेकिन यह शक्ति नोटों के बंडल देखकर इतनी चमत्कारी हो जाएगी, इसका अंदाजा शायद विधाता को भी नहीं था। कलयुग के इस पावन दौर में अध्यात्म का एक नया और आधुनिक शू-मॉडल सामने आया है। अब तक लोग मंदिर के बाहर जूते उतारते थे ताकि पवित्रता बची रहे, पर कुछ अति-पवित्र कर्मियों ने सोचा कि जब तक दान की माया को जूतों और जेबों में शरण न दी जाए, तब तक भक्ति का व्यावहारिक आनंद ही क्या!

राम नाम की लूट में इस बार लूट शब्द को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया गया। उत्तर प्रदेश की एसआईटी ने जब सीसीटीवी कैमरों की दिव्य दृष्टि से गर्भगृह के काउंटिंग रूम का नजारा देखा, तो आंखें फटी की फटी रह गईं। जिसे दुनिया कण-कण में राम समझ रही थी, वहां कुछ चतुर सुजान क्षण-क्षण में दाम बटोरने में व्यस्त थे। कैमरे चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

इस पूरे महायज्ञ में सबसे खूबसूरत बात थी टीम वर्क। हमारी संस्कृति में परस्पर सहयोग को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। फुटेज गवाह है कि जब एक भाई नोटों के बंडल को अपने मोजे में एडजस्ट करने के लिए संघर्ष कर रहा था, तो दूसरा भाई दीवार बनकर खड़ा था ताकि सीसीटीवी की बुरी नजर उसके भाई के इस कठिन परिश्रम को न लग सके।

अब इस महान कलाकारी पर सुरक्षा नियमों का रोना रोया जा रहा है। बायोमेट्रिक हाजिरी नहीं थी, तलाशी नहीं हो रही थी। अरे साहब! जहां चारों तरफ इतनी अगाध श्रद्धा बह रही हो, वहां किसी भक्त की जेब टटोलकर उसकी भक्ति का अपमान करना क्या उचित होता? ट्रस्ट के नुमाइंदों ने तो बस इसी भरोसे की परंपरा को निभाया। अब अगर उस भरोसे का इस्तेमाल किसी ने अपने जूतों का सोल मजबूत करने के लिए कर लिया, तो इसमें व्यवस्था का क्या दोष?

इसी बात पर वर्ष 1970 में बनी फिल्म गोपी का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था राजेंद्र कृष्ण ने और संगीत में ढाला था कल्याणजी आनंदजी ने। इसे महेंद्र कपूर ने अपना स्वर प्रदान किया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

राम चंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा

राम चंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा

राम चंद्र कह गए सिया से…

सिया ने पूछा, भगवन! कलयुग में धरम करम को कोई नहीं मानेगा?

तो प्रभु बोले: धरम भी होगा, करम भी होगा, लेकिन शर्म नहीं होगी!

बात-बात पर लाख कसम खाए, ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा

राम चंद्र कह गए सिया से…

सुनो सिया! कलयुग में काले धन का होगा बोलबाला

सच्चा सीधा पिसेगा और ऐश करेगा साला!

मूरख की होगी धूम-धाम, पंडित घर-घर ठोकर खाएगा

हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा

राम चंद्र कह गए सिया से…

दाता तो भीख मांगेगा और पापी करेगा राज

सती-सावित्री रोएगी और नचनिया का होगा नाज़!

जिसके हाथ में होगी लाठी, भैंस वही ले जाएगा

हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा

राम चंद्र कह गए सिया से…

कलयुग की एक और महिमा सुनो!

बेटा समझेगा खुद को बाप, और बाप बनेगा चेला

बिना टके के देखोगे तुम इस दुनिया का मेला!

भाई से भाई लड़ेगा, और पराया फायदा उठाएगा

हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा

राम चंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा

हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा

राम चंद्र कह गए सिया से…

यह तो बस हिमशैल का सिरा यानी टिप ऑफ द आइसबर्ग है। 25 अप्रैल से पहले का सीसीटीवी फुटेज गायब है। अब जब इतिहास ही गायब हो, तो वर्तमान को कोसने से क्या फायदा? महाकुंभ के मेले में जब लाखों-करोड़ों की भीड़ उमड़ी होगी, तब आस्था की इस गंगा में न जाने कितने हाथ हाथ धो रहे होंगे। सोने-चांदी के बर्तनों और ईंटों का हिसाब होना अभी बाकी है। मुमकिन है कि कुछ सिद्ध पुरुषों ने सोने की शुद्धता जांचने के लिए उसे अपने घर के लॉकर में स्वेच्छा से सुरक्षित रख लिया हो।

इधर, मुख्य कर्ताधर्ता शांत मन से कह रहे हैं—पूरी रिपोर्ट आने दीजिए, फिर जवाब देंगे। वाह! इसे कहते हैं धैर्य का चरम स्तर। जब तक पूरी जांच की आंच जूतों तक न पहुंच जाए, तब तक ध्यानमग्न रहना ही श्रेष्ठ है। आठ कलाकार अभी चौदह दिनों के लिए सरकारी मेहमान हैं। अदालतें तारीखें तय कर रही हैं। देखना दिलचस्प होगा कि 13 जुलाई की सुनवाई में वकीलों की दलीलें इन जूतों और जेबों की गहराई को कैसे माप पाती हैं।