Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अल-ओबेद में गहराता भुखमरी का संकट Gwalior Crime News: पुरानी रंजिश में युवक पर कुल्हाड़ी और सरिये से जानलेवा हमला; पुरानी छावनी पुलिस ... Train AC Maintenance: ट्रेनों में अब नहीं खराब होगा एसी! भोपाल वर्कशाप में 527 कोचों की होगी मरम्मत Housing Board Gwalior: चंबल कॉलोनी में सड़क पर पेड़ देख भड़के लोग; इंजीनियरों की लापरवाही पर खड़े हु... MP Urban Body Election 2027: प्रत्याशी चयन के लिए कांग्रेस ने कसी कमर; पुराने अनुभवों से सीखकर बनाई ... ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में कार्रवाई के बाद नाराज अमेरिका Madhya Pradesh Politics: सीएम मोहन यादव की संपत्ति पर छिड़ी जंग; बीजेपी विधायक ने रॉबर्ट वाड्रा का न... MP High Court on Missing Case: "अगर वह जिंदा होती तो खुद लौट आती"; 10 साल पुराने लापता केस में कोर्ट... Indore Honor Killing Case: इंदौर के पहले ऑनर किलिंग मामले में कोर्ट का फैसला; तेजकरण भालसे हत्याकांड... Jyotiraditya Scindia Guna Visit: गुना को मिली बड़ी सौगात; 42 करोड़ की कूनो नदी पुनर्जीवन परियोजना का ह...

भगवंत मान के विवादित वीडियो का मामला

जांच में एनआईए से जुडे दो लोग गिरफ्तार किये गये

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े एक विवादित वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट में हेरफेर करने के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। हरियाणा पुलिस ने इस मामले में दो व्यक्तियों, अंकित भारद्वाज और अरुण महेंद्रू, को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों आरोपी राष्ट्रीय जांच एजेंसी के साथ अनुबंधित कर्मचारी पाए गए हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के बीच भी हड़कंप मच गया है।

गुरुग्राम पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) नवीन शर्मा ने बताया कि आरोपियों ने जिन फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं का नाम लेकर रिपोर्ट तैयार की थी, वे धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं हैं। अंकित भारद्वाज ने साइफर सेंटिनल लैब के नाम पर वीडियो विश्लेषण की रिपोर्ट दी थी, जो सरकारी विभागों में पंजीकृत नहीं है। इसी तरह, अरुण महेंद्रू ने साइबर यान लैब के नाम पर रिपोर्ट तैयार की, जिसका कोई कानूनी वजूद नहीं है। अपनी रिपोर्ट में दोनों ने दावा किया था कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं हैं।

पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी तब हुई जब एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने शिकायत दर्ज कराई कि पंजाब पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें वीडियो पर अनुकूल रिपोर्ट देने के बदले 10 लाख रुपये की पेशकश की थी। पुलिस ने जब इस मामले की तहकीकात शुरू की, तो फर्जी लैब का जाल सामने आया। अब यह स्पष्ट हो गया है कि पंजाब सरकार को कथित तौर पर बचाने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट का सहारा लिया गया था।

इस खुलासे के बाद पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार चौतरफा घिर गई है। विपक्षी दलों ने बुधवार से ही मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री को बचाने के लिए अपराध और जालसाजी का सहारा ले रहे हैं।

विपक्षी नेताओं ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि चूंकि इस साजिश में एनआईए से जुड़े कर्मचारी और पंजाब पुलिस के उच्चाधिकारी शामिल हैं, इसलिए राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह मामला अब पंजाब की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिससे मान सरकार की छवि पर गहरा असर पड़ रहा है।