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अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान पर जोरः रेवंत रेड्डी

तुंगभद्रा परियोजना के गेट खोलने के बाद ही बात कही

राष्ट्रीय खबर

हैदराबादः तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए अंतरराज्यीय जल बंटवारे के विवादों को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच चल रहे जल संबंधी विवादों को राजनीतिक टकराव के बजाय आपसी सहयोग और समझदारी से सुलझाया जाना चाहिए। यह टिप्पणी उन्होंने कर्नाटक के विजयनगर जिले के होसपेट में तुंगभद्रा जलाशय के सभी 33 स्पिलवे गेटों के आधुनिकीकरण और नए गेटों के उद्घाटन के अवसर पर की।

ऐतिहासिक अवसर और आधुनिक इंजीनियरिंग तुंगभद्रा परियोजना के स्पिलवे गेटों का यह आधुनिकीकरण कार्य लाखों किसानों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। रेवंत रेड्डी ने इस अवसर को एक ऐतिहासिक दिन और स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने वाला दिन करार दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि परियोजना के मूल निर्माण काल की तरह ही महत्वपूर्ण है। सभी 33 पुराने गेटों को बदलकर उनके स्थान पर आधुनिक गेटों की स्थापना से जलाशय की संरचनात्मक मजबूती बढ़ी है, जो भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को टालने और परियोजना की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगी।

सहयोग का आह्वान इस उद्घाटन समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री (डी.के. शिवकुमार के साथ) और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद थे। मुख्यमंत्रियों की इस साझा उपस्थिति को जल विवादों के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ कृष्णा, गोदावरी और तुंगभद्रा नदियों से संबंधित लंबित मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि जल का वितरण किसानों के जीवन से जुड़ा मुद्दा है और इस पर राजनीति करना उचित नहीं है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने राजोलिबांडा डायवर्जन स्कीम से जुड़े जल संकट का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि तेलंगाना को इसके तहत आवंटित 17.9 टीएमसी पानी के मुकाबले वर्तमान में केवल 6 टीएमसी पानी ही मिल पा रहा है। पानी की इस भारी कमी का सीधा असर गडवाल, आलमपुर और पालमुरु क्षेत्रों के किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि सभी संबंधित राज्य मिलकर कार्य करें, तो न केवल इन क्षेत्रों की सिंचाई समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि राज्य से होने वाला पलायन भी रुकेगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से रेवंत रेड्डी ने एक सहयोगी संघवाद का संदेश दिया है, जहाँ विकास और संसाधन प्रबंधन को राजनीति से ऊपर रखकर किसान हित को प्राथमिकता दी जाए।