वे गुफाओँ में आग का इस्तेमाल करते थे
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दक्षिण अफ्रीका की गुफा से सुराग मिला
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वहां अंदर तक जंगल की आग नहीं जाती
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जीवाश्मों पर भी जलने के निशान खोजे गये
राष्ट्रीय खबर
रांचीः मानव प्रजाति का क्रमवार विकास कैसे हुआ, यह निरंतर शोध का विषय है। हर बार नये सुराग से हमें यह पता चलता है कि इस क्रमिक विकास के बारे में हमारे पास पहले अधूरी जानकारी दी। अब वैज्ञानिकों ने नए सबूत खोजे हैं जो बताते हैं कि दक्षिण अफ्रीका की वंडरवर्क गुफा में शुरुआती मानव पूर्वज 10.7 लाख से 17.9 लाख साल पहले आग का इस्तेमाल करते थे। यह खोज होमिन्स (मानव पूर्वजों) द्वारा आग के उपयोग के सबसे पुराने ज्ञात रिकॉर्डों को और पीछे ले जाती है, और इस बारे में नए सुराग देती है कि हमारे पूर्वजों ने पहली बार आग का उपयोग कैसे सीखा।
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जीवाश्म हड्डियों में जलने के निशान पहचानने की एक नई विकसित तकनीक का उपयोग करके, शोधकर्ताओं ने गुफा के अंदर गहराई में बार-बार आग जलने के सबूत पाए हैं। चूँकि ये निशान प्राकृतिक दावानल (जंगल की आग) की पहुँच से बहुत दूर मिले हैं, इसलिए ये निष्कर्ष बताते हैं कि प्रारंभिक मानव जानबूझकर प्राकृतिक रूप से लगने वाली आग को गुफा के अंदर लाते थे और उसे जलाए रखते थे। यह शोध यरूशलेम के हिब्रू विश्वविद्यालय की डॉ. लिओरा कोलस्का होरोविट्ज़ के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा किया गया, जिसमें स्पेन, अर्जेंटीना, कनाडा, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, पुर्तगाल और इज़राइल के वैज्ञानिक शामिल थे।
आग के उपयोग के पुराने प्रमाण यह नया अध्ययन दक्षिण अफ्रीका के कालाहारी रेगिस्तान में स्थित वंडरवर्क गुफा में पहले किए गए कार्यों पर आधारित है। 2012 में, शोध टीम ने लगभग 10 लाख साल पुरानी आग के सबूतों की सूचना दी थी, जिसे तब दुनिया में जानबूझकर आग के उपयोग का सबसे पुराना प्रमाण माना गया था। अब नए विश्लेषणों ने उस समय सीमा को और पीछे धकेल दिया है। पीएलओएस वन में प्रकाशित निष्कर्ष बताते हैं कि प्राचीन मानव पूर्वज आग पैदा करना सीखने से बहुत पहले ही उसके साथ तालमेल बिठा चुके थे। आग ने गर्मी, शिकारियों से सुरक्षा, अंधेरे के बाद रोशनी और अंततः भोजन पकाने जैसी कई सुविधाएं प्रदान कीं।
नई तकनीक से जलने के निशान की पहचान इस अध्ययन में जली हुई हड्डियों के प्रकाश उत्सर्जक गुणों पर आधारित एक नया तरीका अपनाया गया है। जब हड्डियों को विशिष्ट तरंग दैर्ध्य के प्रकाश के संपर्क में लाया जाता है, तो अत्यधिक गर्म हुई हड्डियाँ एक विशेष चमक पैदा करती हैं। शोधकर्ताओं ने इस गैर-विनाशकारी विधि को रासायनिक विश्लेषण के साथ जोड़कर जली हुई जानवरों की हड्डियों की सटीक पहचान की।
निष्कर्ष शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रारंभिक मानव हमेशा आग पैदा करने में सक्षम नहीं थे, बल्कि वे बिजली गिरने या जंगल की आग जैसे प्राकृतिक स्रोतों से आग लाते थे। वे इसे गुफा के अंदर ले जाकर जलाए रखते थे। डॉ. होरोविट्ज़ के अनुसार, ये खोजें बताती हैं कि शुरुआती मानव प्राकृतिक आग के केवल निष्क्रिय दर्शक नहीं थे, बल्कि वे सक्रिय रूप से आग के साथ जुड़कर उसे अपने जीवन में शामिल कर रहे थे। यह नई तकनीक भविष्य में मानव विकास के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ों में से एक, यानी आग के आविष्कार के रहस्यों को सुलझाने में मददगार साबित होगी।
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