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युवक को आईएसआई से मिली थी जिम्मेदारी

आरएसएस कार्यालय में बम फेंकने का नया राज खुला

  • विदेशी संबंधों की भी पुष्टि हो चुकी है

  • गया स्टेशन से पकड़े गये तीन आरोपी

  • इनके संपर्क सूत्रों का भी पता चला है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रादेशिक कार्याल पर हुए हालिया हमले के मामले में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए जा रहे खुलासे बेहद गंभीर हैं। प्रारंभिक जांच में इस आतंकी वारदात का सीधा संबंध पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई  से जुड़ता हुआ नजर आ रहा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर आईएसआई द्वारा कट्टरपंथी बनाया गया था और उन्हें बाकायदा इस हमले को अंजाम देने का टास्क सौंपा गया था।

जांच में पता चला है कि आरोपियों ने हमले से काफी पहले से योजना बनानी शुरू कर दी थी। संघ कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और आसपास के रास्तों की गहन रेकी करने के बाद, 16 जून की रात लगभग 11:35 बजे इस वारदात को अंजाम दिया गया। हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से दो पेट्रोल बमों का उपयोग किया; एक बम कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर गिरा, जबकि दूसरा बम इमारत की छत पर फेंका गया। हमले के बाद भाग रहे तीनों आरोपियों को सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिहार के गया जंक्शन से धर दबोचा।

गोपनीय जांच के निष्कर्षों से पता चला है कि यह एक अत्यधिक समन्वित सीमा पार आतंकी अभियान था, जिसे भारत, संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान तक फैले एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क द्वारा अंजाम दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार, इस साजिश की जड़ें दुबई, यूएई से जुड़ी पाई गईं, जहाँ गिरफ्तार किए गए दो युवक—जिनकी पहचान सैफ अंसारी और अमन अंसारी के रूप में हुई है—हाल ही में यात्रा कर चुके थे और वहां ठहरे थे। दुबई में अपने प्रवास के दौरान, पाकिस्तान के एक नागरिक शाहबाज राणा ने इन दोनों से संपर्क किया, उन्हें अपने प्रभाव में लिया और व्यवस्थित रूप से कट्टरपंथी बनाया।

शाहबाज राणा भट्टी और राना साहब जैसे छद्म नामों का उपयोग करता था। स्थानीय खुफिया फाइलों से संकेत मिलता है कि राणा पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस द्वारा वित्तपोषित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है। यह उन शुरुआती रिपोर्ट्स की पुष्टि करता है, जिनमें रांची की घटना को स्थानीय स्तर की तोड़फोड़ के बजाय एक पूर्व नियोजित आतंकी हमले के रूप में वर्गीकृत किया गया था।