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आपातकाल संविधान पर सीधा हमला था: मोदी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 25 जून 2026 को आपातकाल की 51वीं बरसी पर इसे भारतीय संविधान पर एक सीधा हमला करार दिया। आपातकाल के उस दौर को भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह समय नागरिक स्वतंत्रताओं के निलंबन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश और भारत के लोकतंत्र की नींव कहे जाने वाले संस्थानों को कमजोर करने वाला था।

लोकतंत्र के संघर्ष और नागरिकों का साहस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने उन सभी लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जिन्होंने उस कठिन समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अडिग संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल का वह दौर न केवल संस्थानों पर हमला था, बल्कि उन अनगिनत नागरिकों के असाधारण साहस को भी उजागर करने वाला था जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया और संविधान में निहित आदर्शों को जीवित रखा।

प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों के प्रतीक के रूप में संविधान की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को फिर से दोहराते हैं। हमारे संविधान की भावना से प्रेरित होकर, हम एक ऐसा भारत बनाएंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेगा।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जो पार्टी खुद लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने के लिए जिम्मेदार रही है, आज वही खुद को संविधान के सबसे बड़े रक्षक के रूप में पेश करने का नाटक कर रही है। नवीन ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जब जनता उन्हें चुनाव में नकार देती है, तो उन्हें चुनाव आयोग, ईवीएम और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर संदेह होने लगता है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस ने आज तक आपातकाल के लिए देश से बिना शर्त माफी क्यों नहीं मांगी।

भाजपा अध्यक्ष ने याद दिलाया कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया था। इसके बाद, केवल एक व्यक्ति की कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश को बंधक बना लिया गया। यही कारण है कि मोदी सरकार इस तिथि को संविधान हत्या दिवस के रूप में मना रही है।

नितिन नवीन ने बताया कि उस दौर में लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे हजारों लोकतंत्र सेनानियों को जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने बताया कि किस तरह कश्मीर से कन्याकुमारी तक आम नागरिक और युवा तानाशाही के खिलाफ एकजुट हुए। उन्होंने विशेष उल्लेख किया कि उस संघर्ष के दौरान नरेंद्र मोदी ने खुद को भेष बदलकर गिरफ्तारी से बचाया और लोकतंत्र की रक्षा का संदेश घर-घर तक पहुंचाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हजारों स्वयंसेवकों ने लोकतंत्र को बचाने के लिए भूमिगत रहकर काम किया, जबकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने छात्रों को लामबंद किया। यह संघर्ष अंततः भारत की लोकतांत्रिक भावना की जीत और तानाशाही की विफलता का प्रतीक बना।