तुंगभद्रा परियोजना में अंतर राज्यीय सहयोग का नया अध्याय
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सभी ने बारी बारी से काम किया
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इन राज्यों की सिंचाई में जरूरी है
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अब डैम की जलभंडारण क्षमता बेहतर
राष्ट्रीय खबर
बेंगलुरुः कर्नाटक के होसापेटे में आयोजित एक भव्य समारोह में तुंगभद्रा परियोजना के नवनिर्मित द्वारों का आधिकारिक उद्घाटन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल इंजीनियरिंग के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि यह दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राज्यों—कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना—के बीच जल प्रबंधन और आपसी समन्वय की एक नई और सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करता है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय और राज्य स्तर के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति ने इस परियोजना की राष्ट्रीय और क्षेत्रीय महत्ता को और अधिक स्पष्ट कर दिया।
समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने संयुक्त रूप से द्वारों का उद्घाटन किया। उद्घाटन की प्रक्रिया अत्यंत प्रतीकात्मक और समन्वित थी। गेट संख्या 17 को केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल द्वारा विधिवत रूप से खोला गया। गेट संख्या 18 का कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार द्वारा उद्घाटन किया गया। गेट संख्या 19 के उदघाटन की कमीन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने संभाली। गेट संख्या 20 का उदघाटन तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा संपन्न हुआ।
तुंगभद्रा परियोजना इन तीनों राज्यों के लाखों किसानों और निवासियों के लिए एक जीवन रेखा के समान है। यह बांध न केवल कृषि के लिए सिंचाई का मुख्य स्रोत है, बल्कि यह औद्योगिक और पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी केंद्रीय भूमिका निभाता है। पिछले कुछ समय से बांध के पुराने द्वारों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई थीं। ऐसे में, अत्याधुनिक तकनीक से निर्मित इन नए द्वारों के लगने से बांध की जल भंडारण क्षमता सुरक्षित हुई है और मानसून के दौरान जल निकासी की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो गई है।
यह कार्यक्रम इस बात का भी प्रमाण है कि साझा संसाधनों के प्रबंधन में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विकास के प्रति एकजुट होना कितना आवश्यक है। इन द्वारों का सुचारू संचालन आगामी दशकों में बाढ़ नियंत्रण और जल सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। समारोह के दौरान उपस्थित सभी नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तुंगभद्रा परियोजना का सुदृढ़ीकरण भविष्य में इन तीनों राज्यों की जल आत्मनिर्भरता और समृद्ध कृषि अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा।