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दोनों तरफ से शांति समझौता का संकेत का असर नहीं

होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियां जारी

एजेंसियां

दुबईः शुक्रवार को अमेरिका और ईरान ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए समझौता अंतिम चरण में है। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि दोनों पक्ष एक मसौदे पर सहमत हो गए हैं और आने वाले दिनों में प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद है। दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने राज्य टेलीविजन पर दावा किया कि ईरान, अमेरिका के साथ इस युद्ध का विजेता बनकर उभरा है।

हालांकि, इस राजनयिक सफलता के कुछ घंटों बाद ही होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तनाव फिर भड़क उठा। एक सूत्र के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई आत्मघाती ड्रोन्स को मार गिराया, जो व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बने हुए थे। वहीं, ईरानी मीडिया ने सिरीक बंदरगाह और केश्म द्वीप के पास विस्फोटों की सूचना दी, जिन्हें ईरानी बलों द्वारा चेतावनी के रूप में की गई गोलीबारी बताया गया।

इस प्रस्तावित समझौते में मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की बात कही गई है। समझौते के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा होनी है। हालांकि, शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं। जहाँ अमेरिकी अधिकारी इसे प्रदर्शन-आधारित और राष्ट्रपति ट्रंप के उद्देश्यों के अनुरूप बता रहे हैं, वहीं ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि वे अपने समृद्ध यूरेनियम को नष्ट करने के बजाय उसे डाउन-ब्लेंड (सांद्रता कम करना) करने के पक्ष में हैं।

इस समझौते का एक बड़ा हिस्सा ईरान की जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्ति को जारी करना और तेल निर्यात पर से प्रतिबंध हटाना है। इस पूरे घटनाक्रम में इज़राइल को शामिल नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश इस समझौते का पक्ष नहीं होगा और वे अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई करने की स्वतंत्रता बनाए रखेंगे।

युद्ध में तेजी से बढ़ते ईंधन मूल्यों और घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच व्हाइट हाउस के लिए यह समझौता काफी महत्वपूर्ण है। शांति की इस संभावना का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा; शेयर बाजार में उछाल आया और कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। शांति वार्ता का भविष्य अब रविवार को होने वाले संभावित हस्ताक्षर पर टिका है, जिसे लेकर अभी भी अंतिम आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।