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अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता सोमवार को

प्रारंभिक अड़चनों के बाद युद्ध रोकने की गाड़ी आगे बढ़ी

एजेंसियां

इस्लामाबादः अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों के तहत वार्ता का अगला और महत्वपूर्ण दौर सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने की संभावना है। ईरानी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताहांत तक पाकिस्तान पहुँच सकते हैं। हालाँकि, अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर अभी तक वार्ता की समय-सारणी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन पाकिस्तान की सक्रिय मध्यस्थता और हालिया कूटनीतिक हलचलें इस बात की पुष्टि करती हैं कि दोनों पक्ष किसी न किसी स्तर पर संवाद के लिए तैयार हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बयान में विश्वास जताया कि दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब हैं। ट्रंप का मानना है कि उनकी अधिकतम दबाव की नीति और हालिया नौसैनिक घेराबंदी ने ईरान को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया है। दूसरी ओर, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ट्रंप के उन दावों पर संदेह जताया है जिनमें कहा गया था कि तेहरान रियायतें देने के लिए तैयार है। ईरानी पक्ष का स्पष्ट रुख है कि जब तक अमेरिका क्षेत्र में लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध और आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह नहीं हटाता, तब तक कोई भी स्थायी समझौता संभव नहीं होगा।

समुद्री सुरक्षा और व्यापार के मोर्चे पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। यद्यपि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है। शुक्रवार को इस प्रमुख जलमार्ग से केवल मुट्ठी भर जहाज ही गुजरे। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपनी नौसैनिक घेराबंदी बंद नहीं की, तो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को फिर से बंद कर दिया जाएगा। ज्ञात हो कि अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 से ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण सैन्य घेराबंदी कर रखी है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन लगभग 400 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है।

इसी बीच, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच घोषित 10 दिवसीय युद्धविराम मोटे तौर पर लागू है, हालांकि लेबनान ने इजरायल पर संघर्ष विराम के उल्लंघन के कई आरोप लगाए हैं। इजरायल-लेबनान सीमा पर यह शांति प्रक्रिया ईरान के साथ चल रही वार्ता का एक मुख्य बिंदु बनी हुई है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने समर्थित समूहों, विशेषकर हिजबुल्लाह पर लगाम लगाए, जबकि ईरान इसे अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा का हिस्सा मानता है। पाकिस्तान, तुर्की और कतर जैसे देश इस जटिल कूटनीतिक गुत्थी को सुलझाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं ताकि मध्य पूर्व को एक व्यापक युद्ध की विभीषिका से बचाया जा सके।