Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
आई एजेंट्स ने साइबर सुरक्षा टेस्टिंग के दौरान बनाई फर्जी ऑनलाइन पहचान, यूके AI सिक्योरिटी इंस्टीट्यू... सावन में गूंज रहे 'हर-हर महादेव' के जयकारे, डिंडौरी के ऋण मुक्तेश्वर धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सै... तंदुरुस्त दिखने वाले बॉडीबिल्डर क्यों हो रहे अचानक अकाल मृत्यु के शिकार? 2025 के आंकड़े डरा रहे दिल्ली-एनसीआर में 10 अगस्त तक थमने वाली नहीं बारिश! यूपी, बिहार और एमपी में अति भारी वर्षा का अलर्ट ... केरल और असम में बारिश-बाढ़ का तांडव: केरल में 25 और असम में 87 मौतें; 8 जिलों में रेड अलर्ट जारी आवारा कुत्तों व मवेशियों की समस्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी सरकार को 2 हफ्ते में व्यापक एक्शन... गिरिडीह में आसमानी बिजली का कहर! 4 मासूम बच्चों समेत 5 लोगों की दर्दनाक मौत, क्षेत्र में शोक की लहर महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल के संकेत! मंत्रियों की ढिलाई पर भड़के एकनाथ शिंदे, संगठन विस्त... भोपाल जंगल सोना-कैश कांड: पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मिली जमानत, 18 महीने बा... सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा ईंधन, नए वाह...

वैज्ञानिकों ने लैब में विकसित इंसुलिन कोशिकाएं, देखें वीडियो

चूहों में मधुमेह ठीक करने का प्रयोग सफल

  • स्टेम सेल से विकसित कोशिकाएं

  • टाइप वन मधुमेह के लिए कारगर

  • पुरानी चुनौतियों का समाधान दिखा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः स्वीडन के वैज्ञानिकों ने मानव स्टेम कोशिकाओं से इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं तैयार करने का एक अधिक विश्वसनीय तरीका खोज निकाला है। स्टेम सेल रिपोर्ट्स में प्रकाशित यह शोध टाइप 1 मधुमेह के उपचार की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। शोध के अनुसार, लैब में विकसित इन कोशिकाओं ने रक्त शर्करा को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया और चूहों में मधुमेह को पूरी तरह ठीक करने में सफलता प्राप्त की।

देखें इससे संबंधित वीडियो

टाइप 1 मधुमेह तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इंसुलिन के बिना, शरीर रक्त से ग्लूकोज को अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है। इन नष्ट हुई कोशिकाओं को बदलना लंबे समय से एक संभावित समाधान रहा है, लेकिन स्टेम कोशिकाओं से इन्हें विकसित करने के पिछले प्रयास अस्थिर रहे थे।

करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर पेर-ओलोफ बर्गग्रेन और शोधकर्ता सिकिन वू ने बताया कि उन्होंने एक ऐसी विधि विकसित की है जो कई मानव स्टेम सेल लाइनों से उच्च गुणवत्ता वाली इंसुलिन कोशिकाएं बनाती है। यह भविष्य में पेशेंट-स्पेसिफिक यानी रोगी के अनुरूप सेल थेरेपी के द्वार खोलता है, जिससे शरीर द्वारा नई कोशिकाओं को अस्वीकार करने का जोखिम कम हो जाएगा।

नई तकनीक से बनी ये कोशिकाएं पिछली विधियों की तुलना में अधिक परिपक्व और सक्रिय हैं। प्रयोगशाला परीक्षणों में इन कोशिकाओं ने ग्लूकोज के स्तर पर सटीक प्रतिक्रिया देते हुए इंसुलिन जारी किया। जब इन्हें मधुमेह से ग्रस्त चूहों में प्रत्यारोपित किया गया, तो उन्होंने धीरे-धीरे चूहों की ब्लड शुगर नियंत्रित करने की क्षमता को बहाल कर दिया। शोधकर्ताओं ने इन कोशिकाओं को चूहों की आंख के अगले हिस्से में प्रत्यारोपित किया, जिससे वे बिना किसी बड़े ऑपरेशन के समय के साथ कोशिकाओं के विकास की निगरानी कर सके।

टाइप 1 मधुमेह के लिए स्टेम सेल थेरेपी के क्लिनिकल ट्रायल पहले से चल रहे हैं, लेकिन उनमें कई बाधाएं थीं। अक्सर स्टेम कोशिकाएं उपयोगी कोशिकाओं के साथ-साथ अवांछित कोशिकाएं भी बनाने लगती थीं, जिससे जोखिम बढ़ जाता था। साथ ही, लैब में बनी कोशिकाएं अक्सर इतनी परिपक्व नहीं होती थीं कि वे ग्लूकोज पर सही प्रतिक्रिया दे सकें।

इन समस्याओं को हल करने के लिए, शोधकर्ताओं ने संवर्धन प्रक्रिया को बेहतर बनाया और कोशिकाओं को प्राकृतिक त्रि-आयामी गुच्छे बनाने की अनुमति दी। इससे अवांछित कोशिकाओं की संख्या कम हुई और ग्लूकोज के प्रति उनकी प्रतिक्रिया में सुधार हुआ। करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर फ्रेडरिक लैनर ने कहा कि यह शोध उन बाधाओं को दूर कर सकता है जो अब तक टाइप 1 मधुमेह के उपचार में आ रही थीं। अब टीम इसे क्लिनिकल परीक्षणों की ओर ले जाने पर काम कर रही है।

#DiabetesCure #StemCellResearch #MedicalBreakthrough #Type1Diabetes #ScienceNews #मधुमेह_उपचार #स्टेम_सेल #मेडिकल_साइंस #टाइप1_डायबिटीज #विज्ञान_समाचार