Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
MP News: मध्य प्रदेश में बिछेगा सड़कों का जाल; CM मोहन यादव बनाएंगे 2117KM नई सड़कें, पीएम मोदी का व... Rajgarh News: “मेरा गेहूं लौटाओ...” 40 किलो अनाज के लिए सड़क पर धरने पर बैठा मजदूर; बस रोककर जताया व... Traffic Alert: आम से लदा ट्रक पलटने से हाइवे पर लगी वाहनों की लंबी कतार; एम्बुलेंस और बारातियों की ग... MP IPS Transfer List: मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; ग्वालियर DIG समेत 3 सीनियर IPS अधिकारिय... Indore Road Accident: मदर्स डे पर इंदौर में दर्दनाक हादसा; बेटे की आंखों के सामने मां ने तोड़ा दम, ड... Gwalior Crime Report: ग्वालियर में दहलीज के भीतर 'लाडली' बेहाल; दहेज हत्या के मामले घटे, लेकिन घरेलू... Khargone News: खरगोन में वेदा नदी के पुराने पुल की प्लेट धंसी; वाहन गुजरते समय कांप रहा है ब्रिज, बड... Crime in Bhopal: राजधानी में खौफनाक वारदात! ई-रिक्शा चालक ने दोस्तों के साथ मिलकर युवक को चाकू से रे... AIIMS News: एम्स से मोहभंग! आखिर क्यों संस्थान छोड़ रहे हैं दिग्गज डॉक्टर्स? जानें इस्तीफे की 5 बड़ी... PM Modi in Bengaluru: "कांग्रेस सत्ता की भूखी है!" बेंगलुरु में पीएम मोदी का वार— कहा, मौका मिलते ही...

पुतिन के शासनकाल में इतिहास के पुनर्लेखन का खेल

पोलैंड के मामले में नये तथ्यों से विवाद

वारसाः वर्तमान में जहाँ मध्य पूर्व का युद्ध वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मचा रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता की परीक्षा ले रहा है, वहीं व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाले रूस के लिए एक आंतरिक प्राथमिकता अभी भी अडिग बनी हुई है: इतिहास का पुनर्लेखन। पिछले सप्ताह रूस की सरकार समर्थित रशियन मिलिट्री-हिस्टोरिकल सोसाइटी ने पश्चिमी स्मोलेंस्क क्षेत्र में एक नई प्रदर्शनी का अनावरण किया, जिसका शीर्षक पोलिश रसोफोबिया (रूस के प्रति घृणा) की 10 सदियाँ रखा गया है। यह कदम ऐतिहासिक तथ्यों और कूटनीतिक मर्यादाओं के संदर्भ में एक नया विवाद खड़ा करता है।

एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस प्रदर्शनी का मुख्य केंद्र इतिहास के विभिन्न कालखंडों में पोलिश राज्य के अभिजात वर्ग द्वारा रूस और रूसी लोगों के प्रति दिखाई गई कथित नफरत है। इसमें यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि कैसे इस घृणा ने रूसी क्षेत्रों पर कब्ज़े और रूसी, बेलारूसी एवं लिटिल रशियन (यूक्रेनियों के लिए रूसी साम्राज्यवादी शब्द) लोगों के विनाश जैसे ठोस कार्यों का रूप लिया। प्रदर्शनी की भाषा न केवल राष्ट्रवादी है, बल्कि यह उन ऐतिहासिक घावों को भी कुरेदती है जो रूस और पोलैंड के संबंधों के बीच लंबे समय से तनाव का कारण रहे हैं।

विशेष रूप से, यह प्रदर्शनी कातिन मेमोरियल की भूमि पर आयोजित की गई है, जो स्वयं में एक त्रासदी का प्रतीक है। यही वह स्थान है जहाँ 1940 में सोवियत गुप्त पुलिस द्वारा 20,000 से अधिक पोलिश अधिकारियों, बुद्धिजीवियों और युद्धबंदियों की सामूहिक हत्या की गई थी। दशकों तक सोवियत अधिकारियों ने इस अपराध को छुपाया और इसका दोष नाजियों पर मढ़ा।

विडंबना यह है कि यह चौंकाने वाली प्रदर्शनी कातिन नरसंहार के पीड़ितों के आधिकारिक स्मरणोत्सव से कुछ ही दिन पहले खोली गई। स्मोलेंस्क 2010 की उस विमान दुर्घटना का भी गवाह है जिसमें पोलैंड के राष्ट्रपति लेक काचिंस्की और कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मृत्यु हो गई थी, जो कातिन नरसंहार की 70वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे थे।

यद्यपि पूर्व में रूसी सरकार ने जोसेफ स्टालिन और उनके शासन के अपराधों को स्वीकार करने की दिशा में कुछ कदम उठाए थे, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह नई प्रदर्शनी अधिनायकवाद के अपराधों को नकारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। स्वतंत्र समाचार पत्र नोवाया गजेटा यूरोप के संपादक किरिल मार्टिनोव ने इसे शर्मनाक करार दिया है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे रूस अपनी भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पुख्ता करने के लिए इतिहास की स्मृतियों को एक हथियार के रूप में उपयोग कर रहा है।