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यूरेनियम निर्यात का महत्वपूर्ण समझौता संपन्न

पीएम मोदी का ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न में जोरदार स्वागत

  • भारत काफी समय से प्रयासरत था

  • परमाणु बिजली उत्पादन में फायदा

  • कृषि और रक्षा पर भी समझौते हुए

एजेंसियां

मेलबोर्नः ऑस्ट्रेलिया और भारत ने परमाणु ऊर्जा उद्योग में उपयोग के लिए भारतीय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम के निर्यात को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। गुरुवार को मेलबर्न में अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज के साथ बातचीत के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, हमने आज परमाणु ऊर्जा पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता साफ करेगा और हमारे स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को एक नई गति देगा। एक संयुक्त बयान में कहा गया कि यह व्यवस्था विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए दीर्घकालिक यूरेनियम निर्यात की अनुमति देती है।

भारत लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया के यूरेनियम भंडार पर नजर गड़ाए हुए है, जो दुनिया की कुल आपूर्ति का लगभग 28 प्रतिशत है। इसका उद्देश्य साल 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करना है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया अपने शीर्ष भागीदार चीन पर अपनी निर्भरता को कम कर अपने व्यापार में विविधता लाना चाहता है।

यह निर्यात वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा स्थापित सुरक्षा उपायों के दायरे में होगा।

अल्बनीज ने संवाददाताओं से कहा, यह व्यवस्था भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम के निर्यात को सुगम बनाती है ताकि गैर-जीवाश्म-ईंधन बिजली क्षमता की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सके। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साल 2014 में एक परमाणु सहयोग समझौता किया था। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने इस चिंता के कारण भारत को यूरेनियम की सीमित आपूर्ति ही निर्यात की थी कि इस सामग्री का उपयोग हथियार बनाने में किया जा सकता है।

मोदी और अल्बनीज रक्षा सहयोग को मजबूत करने तथा महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को बढ़ावा देने पर भी सहमत हुए। संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों की हिंद महासागर में ऑस्ट्रेलिया के कोकोस कीलिंग द्वीप समूह पर एक अस्थायी अंतरिक्ष ट्रैकिंग टर्मिनल बनाने की भी योजना है, जो भारतीय अंतरिक्ष उड़ान परियोजनाओं को सहायता प्रदान करेगा। अल्बनीज ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में मदद के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की।

अल्बनीज ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी, आपका नेतृत्व और ऑस्ट्रेलिया के साथ आपका व्यक्तिगत जुड़ाव इस बदलाव के लिए पूरी तरह से मुख्य केंद्र रहा है। भारत, ऑस्ट्रेलिया का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। ऑस्ट्रेलियाई सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-2025 के दौरान वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 54.4 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (37.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर) आंका गया था। पीएम मोदी इंडोनेशिया के दौरे के बाद ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे, जहां उन्होंने कृषि और रक्षा पर कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। वह भारत लौटने से पहले शुक्रवार को न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे।