यादवपुर विश्वविद्यालय में छात्रों का संघर्ष
जीबी बैठक बुलाने के मुद्दे पर हंगामा
एवीबीपी का आरोप उनपर हमला हुआ
वामपंथी संगठन से जुड़े लोगों का हमला
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः बुधवार रात से यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण और रणक्षेत्र जैसी बन गई है। गुरुवार सुबह भी विश्वविद्यालय परिसर में तनाव का माहौल बना रहा। वर्तमान में विश्वविद्यालय में कोई आधिकारिक छात्र संघ न होने के बावजूद सामान्य निकाय (जीबी) की बैठक बुलाए जाने को लेकर सवाल खड़े करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों ने इसका विरोध किया। उनका आरोप है कि इसी का विरोध करने पर 70 से 80 लोगों की एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया।
इस पूरी घटना के बाद गुरुवार को एबीवीपी के सदस्यों ने यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति को एक ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया। हालांकि, ज्ञापन सौंपने से पहले ही एबीवीपी के अध्यक्ष निखिल दास ने आरोप लगाया कि कुलपति परिसर से नदारद हैं। उन्होंने कहा कि जब रात के समय वे वामपंथी और नक्सली छात्र संगठनों के हमलों का सामना कर रहे थे, तब उन्होंने अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें असहाय स्थिति में छोड़कर कुलपति परिसर से चले गए और अदालत के आदेश के बावजूद परिसर में पुलिस पिकेट की व्यवस्था नहीं की गई।
एबीवीपी अध्यक्ष ने दावा किया कि बुधवार रात का हमला पूरी तरह से सुनियोजित था। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों ने जानबूझकर कक्षाएं रद्द कीं और छात्र पढ़ाई छोड़कर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी घटना में शामिल लोगों में एक बड़ा हिस्सा उग्र वामपंथी विचारधारा से जुड़ा हुआ है। संगठन ने उच्च शिक्षा विभाग से परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
दूसरी ओर, यादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जूटा) ने बुधवार रात की हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए एक बयान जारी किया है। संघ ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में तुरंत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करनी चाहिए और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की हिंसा और गुंडागर्दी बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।