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खसरे के प्रकोप से 500 से अधिक बच्चों की मौत

मार्च से बिगड़े माहौल में अब तक खास सुधार नहीं हुआ

एजेंसियां

ढाका: बांग्लादेश में फैले खसरे के प्रकोप के कारण 500 से अधिक बच्चों की मौत हो गई है, जिसे पिछले कई दशकों में वहां का सबसे घातक संकट माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 मार्च से शुरू किए गए आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को भी मृतकों की संख्या में बढ़ोतरी जारी रही और पिछले 24 घंटों में ही 13 बच्चों की जान चली गई, जिससे कुल मौतों का आंकड़ा 512 तक पहुंच गया है। राजधानी ढाका के अस्पताल, जो इस बीमारी के मामलों से पूरी तरह भरे हुए हैं, वहां विशेष वार्ड तो बनाए गए हैं लेकिन गहन चिकित्सा कक्ष के बिस्तरों की भारी कमी है।

खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो खांसने और छींकने से फैलती है और एक बार इसकी चपेट में आने के बाद इसका कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती है और इसके कारण निमोनिया, मस्तिष्क में सूजन और मृत्यु जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, विशेषकर उन बच्चों में जो कुपोषित हैं या जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। दुनिया भर में टीकों के जरिए रोकी जा सकने वाली बच्चों की मौतों के प्रमुख कारणों में यह आज भी शामिल है।

17.5 करोड़ (175 मिलियन) की आबादी वाले इस दक्षिण एशियाई देश ने इस प्रकोप से निपटने के लिए एक व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की देश प्रमुख राना फ्लावर्स ने इस सप्ताह बताया कि इस अभियान के तहत 18 मिलियन (1.8 करोड़) बच्चों तक पहुंच बनाई गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस टीकाकरण का पूरा असर दिखने में अभी महीनों का समय लगेगा।

मौजूदा प्रकोप के दौरान दर्ज किए गए अधिकांश मामले छह महीने से पांच साल की उम्र के बच्चों के हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में पहुंचने वाले कई बच्चे पहले से ही गंभीर रूप से बीमार थे। ढाका के शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ ऐनुल इस्लाम खान ने बताया, हालांकि खसरा अत्यधिक संक्रामक है, लेकिन बिना किसी जटिलता वाला एक स्वस्थ बच्चा न्यूनतम दवाओं के साथ भी ठीक हो सकता है। पर यहां अस्पताल आने वाले अधिकांश बच्चों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों, गले व फेफड़ों में संक्रमण की समस्या थी।