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लेबनान पर हमले में इस बार 14 की मौत

हिजबुल्लाह को छूट देने को तैयार नहीं है इजरायल

एजेंसियां

बेरूतः इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष एक बार फिर हिंसक मोड़ ले चुका है। रविवार, 26 अप्रैल 2026 को लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि इजरायली हमलों में 14 लोगों की जान चली गई और 37 अन्य घायल हुए हैं। मृतकों में दो बच्चे और दो महिलाएं भी शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इजरायली सेना ने निवासियों को बफर जोन के बाहर स्थित सात और कस्बों को तुरंत खाली करने की चेतावनी दी है, जिससे व्यापक विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है।

बफर जोन और विस्थापन की चुनौती इजरायली सैन्य प्रवक्ता ने एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि हिजबुल्लाह लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है, जिसके जवाब में इजरायल कार्रवाई करने को मजबूर है। सेना ने लोगों को लिटानी नदी के उत्तर और पश्चिम की ओर जाने का निर्देश दिया है। ये सात कस्बे उस क्षेत्र से बाहर स्थित हैं जिसे इजरायल ने पहले बफर जोन घोषित किया था। इजरायली सेना का दावा है कि उन्होंने हिजबुल्लाह के लड़ाकों, रॉकेट लॉन्चरों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया है।

युद्धविराम की नाजुक स्थिति और राजनीतिक रुख 16 अप्रैल 2026 को अमेरिका की मध्यस्थता में शुरू हुआ युद्धविराम अब टूटने की कगार पर है। यद्यपि इसे मई के मध्य तक बढ़ाया गया था, लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं। यरुशलम में कैबिनेट बैठक के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, हमारी प्राथमिकता इजरायल की सुरक्षा, हमारे सैनिकों और समुदायों की रक्षा है।

दूसरी ओर, ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह ने स्पष्ट किया है कि जब तक इजरायल युद्धविराम का उल्लंघन बंद नहीं करता, वे उत्तरी इजरायल और लेबनान के भीतर इजरायली सैनिकों पर हमले जारी रखेंगे। हिजबुल्लाह का कहना है कि वे अब उस कूटनीति पर भरोसा नहीं कर सकते जो अप्रभावी साबित हुई है।

हताहतों के आंकड़े और मानवीय संकट 2 मार्च 2026 को शुरू हुए इस हालिया संघर्ष में अब तक लेबनान में 2,500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 277 महिलाएं, 177 बच्चे और 100 स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। रविवार की झड़पों में एक इजरायली सैनिक की भी मौत हुई है और छह अन्य घायल हुए हैं। मार्च की शुरुआत से अब तक कुल 16 इजरायली सैनिक लेबनान में मारे जा चुके हैं। क्षेत्र में जारी यह अस्थिरता न केवल मानवीय संकट को गहरा रही है, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को भी बल दे रही है।