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बोलीविया और चिली के बीच रिश्ता बहाल करने का प्रयास

पांच दशक की तनातनी के बाद अब सीमा पर माहौल बदलेगा

एजेंसियां

सेंटियागोः दक्षिण अमेरिका के दो पड़ोसी देशों, बोलीविया और चिली के बीच पिछले पांच दशकों से चले आ रहे कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने सीमा पर मुलाकात की, जिसे 1975 में टूटे हुए द्विपक्षीय संबंधों को फिर से जोड़ने की एक गंभीर कोशिश माना जा रहा है।

बोलीविया के विदेश मंत्री ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए इसे भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया है। गौरतलब है कि इन दोनों राष्ट्रों के बीच संबंधों में खटास का मुख्य कारण बोलीविया की प्रशांत महासागर तक पहुंच की मांग रही है, जो 19वीं शताब्दी के अंत में हुए प्रशांत युद्ध के बाद से एक विवादित मुद्दा बना हुआ है।

ऐतिहासिक रूप से, बोलीविया के पास एक विस्तृत तटरेखा थी, लेकिन चिली के साथ हुए युद्ध में उसे अपनी 400 किलोमीटर (250 मील) लंबी तटीय भूमि गंवानी पड़ी थी। तब से बोलीविया एक स्थल-अवरुद्ध देश बनकर रह गया है। समुद्र तक फिर से पहुंच प्राप्त करना दशकों से बोलीविया की विदेश नीति का प्राथमिक लक्ष्य रहा है।

अपनी इस खोई हुई जमीन की याद में बोलीविया हर साल डिया डेल मार (समुद्र दिवस) नामक अवकाश मनाता है, जो उनके राष्ट्रीय स्वाभिमान और ऐतिहासिक क्षति का प्रतीक है। गुरुवार को चिली के विदेश मंत्री फ्रांसिस्को पेरेज़ मैककेना और बोलीविया के फर्नांडो अरामायो ने एक सीमा चौकी पर मुलाकात की और वहां से साथ मिलकर ला पाज़ की यात्रा की। अरामायो ने पत्रकारों से बात करते हुए इस बैठक को संबंधों की बहाली के रास्ते पर एक मौलिक मील का पत्थर करार दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पूर्व शत्रुओं के बीच यह बढ़ती निकटता सत्ता परिवर्तन का परिणाम है। बोलीविया में वर्तमान में केंद्र-दक्षिणपंथी राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज़ शासन कर रहे हैं, जबकि चिली में हाल ही में धुर दक्षिणपंथी नेता जोस कास्ट ने सत्ता संभाली है। दोनों नेताओं की विचारधारा में सामंजस्य ने बातचीत के द्वार खोले हैं।

हालांकि, इस सहयोग के पीछे चिली का अपना एक महत्वपूर्ण एजेंडा भी है। चिली, जो दक्षिण अमेरिका के सबसे विकसित देशों में से एक है, अपनी उत्तरी सीमा के माध्यम से होने वाले अवैध अप्रवासन को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। बोलीविया, जो इस महाद्वीप के गरीब देशों में गिना जाता है, चिली के लिए प्रवासियों का एक प्रमुख मार्ग रहा है।

11 मार्च को सत्ता संभालने वाले राष्ट्रपति जोस कास्ट ने सुरक्षा के कड़े उपाय अपनाते हुए सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए तीन मीटर (10 फीट) गहरी खाई खोदने का आदेश दिया है। दिलचस्प बात यह है कि बोलीविया ने चिली के इस विवादास्पद प्रोजेक्ट पर अब तक कोई सार्वजनिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, जो इस बात का संकेत है कि दोनों देश अन्य क्षेत्रीय मुद्दों और कूटनीतिक लाभ के लिए कुछ कड़े फैसलों पर मौन सहमति बनाने को तैयार हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चिली, बोलीविया की समुद्र तक पहुंच की सदियों पुरानी मांग पर कोई नरम रुख अपनाता है या नहीं।