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इतालवी शांति सैनिकों ने बदला खंडित क्रूस

इजरायली सैनिकों की अभद्र हरकत के बाद कार्रवाई

एजेंसियां

रोमः इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने गुरुवार को घोषणा की कि दक्षिणी लेबनान में तैनात इतालवी संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों ने ईसा मसीह की उस प्रतिमा को बदल दिया है, जिसे हाल ही में इजरायली सैनिकों द्वारा खंडित कर दिया गया था। दक्षिणी लेबनान के देबेल गाँव में एक क्रूस को तोड़े जाने और उसके अपमान की तस्वीर इस सप्ताह सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक निंदा की गई थी। इस घटना ने क्षेत्र में धार्मिक संवेदनशीलता और शांति प्रयासों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

इजरायली रक्षा बलों के जिन दो सैनिकों को इस कृत्य में शामिल पाया गया, उनके खिलाफ इजरायली सेना ने त्वरित कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, उन्हें तत्काल प्रभाव से युद्ध ड्यूटी से हटा दिया गया है और 30 दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया गया है। हालांकि, इस घटना से स्थानीय समुदाय में जो आक्रोश और दुःख फैला था, उसे कम करने के लिए इतालवी दल ने एक सराहनीय मानवीय पहल की। प्रधानमंत्री मेलोनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कदम की सराहना की और शांति सैनिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

मेलोनी ने अपने बयान में कहा, मैं कमांडर डियोडाटो अबाग़नारा और संपूर्ण इतालवी यूनिफिल दल को लेबनानी गाँव देबेल को एक नया क्रूस दान करने का निर्णय लेने के लिए धन्यवाद देना चाहती हूँ। उन्होंने आगे कहा कि नई प्रतिमा को स्थानीय समुदाय को सौंपने और उसे ठीक उसी स्थान पर स्थापित करने की तस्वीरें दिल को छू लेने वाली हैं, जहाँ कुछ दिन पहले एक आईडीएफ सैनिक द्वारा नष्ट की गई प्रतिमा खड़ी थी। मेलोनी के अनुसार, यह कार्य न केवल एक धार्मिक प्रतिमा की पुनर्स्थापना है, बल्कि यह दुनिया को आशा, संवाद और शांति का एक शक्तिशाली संदेश भी भेजता है।

लेबनान का देबेल गाँव मुख्य रूप से ईसाई आबादी वाला क्षेत्र है, और वहां इस तरह की घटना सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकती थी। इतालवी शांति सैनिकों की इस सक्रियता ने न केवल स्थानीय लोगों के घावों पर मरहम लगाने का काम किया है, बल्कि शांति सेना के रूप में उनके ब्लू हेलमेट मिशन की तटस्थता और संवेदनशीलता को भी प्रमाणित किया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि मेलोनी सरकार ने इस मुद्दे पर जो रुख अपनाया है, वह मध्य पूर्व में इटली की कूटनीतिक भूमिका और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह घटना दर्शाती है कि युद्ध के मैदान में भी छोटे-छोटे मानवीय और सम्मानजनक कार्य शांति बहाली में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।