एक महीने में दूसरे मंत्री ने कुर्सी छोड़ी
नेपाल की नई सरकार में भी राजनीतिक अस्थिरता
राष्ट्रीय खबर
काठमांडूः नेपाल की राजनीति में उथल-पुथल का दौर जारी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और सुशासन के वादे के साथ सत्ता में आई नई सरकार को एक और बड़ा झटका लगा है। देश के गृह मंत्री सूदन गुरुंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके निवेश और अन्य वित्तीय मामलों पर सवाल उठने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली इस एक महीने पुरानी सरकार से बाहर होने वाले गुरुंग दूसरे कैबिनेट मंत्री बन गए हैं।
38 वर्षीय सूदन गुरुंग ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से इस निर्णय की सार्वजनिक घोषणा की। उन्होंने विस्तार से जानकारी दिए बिना कहा कि उनके खिलाफ उठ रहे सवालों की जांच होनी चाहिए। गुरुंग ने लिखा, मेरे लिए पद से बड़ा नैतिक मूल्य है और जनता के भरोसे से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और नेतृत्व को जवाबदेह होना चाहिए।
गुरुंग 27 मार्च को पद संभालने वाले सूदन गुरुंग उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने पिछले साल सितंबर में युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर हुई दमनकारी कार्रवाई की जांच के सिलसिले में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी का आदेश दिया था। हालांकि, अब खुद उनके निजी निवेशों पर सवालिया निशान लगने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार दीपा दहाल ने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि नए गृह मंत्री की नियुक्ति तक प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह स्वयं इस मंत्रालय का कार्यभार संभालेंगे।
35 वर्षीय रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पिछले महीने हुए संसदीय चुनावों में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आए थे। उनकी पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, ने भ्रष्टाचार नियंत्रण और पारदर्शिता का वादा किया था। काठमांडू के मेयर के रूप में अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान सुधारवादी कार्यों से लोकप्रियता हासिल करने वाले शाह ने पद संभालते ही 100 सूत्रीय सुधार एजेंडा जारी किया था। इसके तहत, हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में राजनेताओं की संपत्ति की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है।
यह इस महीने का दूसरा बड़ा इस्तीफा है। इससे पहले, प्रधानमंत्री शाह ने श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को पद से हटा दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पत्नी को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के निदेशक मंडल में नियुक्त करवाकर अपने पद की गरिमा का दुरुपयोग किया है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में नेपाल वर्तमान में 180 देशों में 109वें स्थान पर है, जिसे सुधारना शाह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।