गाजा संकट दूर करने अब अकेले आगे बढ़ रही ट्रंप सरकार
एजेंसियां
वाशिंगटन: गज़ा पट्टी में जारी अस्थिर शांति और युद्धविराम प्रक्रिया में आए गतिरोध को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ आया है। दो वर्षों के भीषण युद्ध के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका और हमास के प्रतिनिधियों ने पहली बार सीधे तौर पर वार्ता की मेज पर आमने-सामने बैठकर चर्चा की। यह बैठक मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका की मध्यस्थता में हुए उस नाजुक समझौते को फिर से पटरी पर लाना है, जो वर्तमान में लागू होने के कगार पर संघर्ष कर रहा है।
हमास के सूत्रों के अनुसार, मंगलवार रात हुई इस गोपनीय बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वरिष्ठ सलाहकार आर्य लाइटस्टोन ने किया। उनके साथ गज़ा के लिए बोर्ड ऑफ पीस के उच्च प्रतिनिधि निकोले म्लादेनोव भी मौजूद थे। हमास की ओर से मुख्य वार्ताकार खलील अल-हय्या ने नेतृत्व किया। गौरतलब है कि अल-हय्या पिछले साल सितंबर में दोहा में एक इजरायली हत्या के प्रयास में बाल-बाल बचे थे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस बैठक पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इसे जारी वार्ता का हिस्सा बताया है।
अक्टूबर में हुए संघर्षविराम समझौते के तहत दो साल के युद्ध पर विराम तो लगा था, लेकिन गज़ा के भविष्य और शासन व्यवस्था पर सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। बैठक के दौरान अल-हय्या ने स्पष्ट किया कि जब तक इजरायल समझौते के पहले चरण की शर्तों को पूरी तरह लागू नहीं करता—जिसमें हमलों को रोकना और मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति शामिल है—तब तक अगले चरण पर चर्चा संभव नहीं है।
दूसरी ओर, इजरायल ने शर्त रखी है कि वह पहले चरण की प्रतिबद्धताओं को तभी पूर्ण करेगा जब हमास अपने निरस्त्रीकरण के लिए सहमत हो जाए। हमास ने इस प्रस्ताव को असंतुलित करार दिया है। हमास के एक वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि यह प्रस्ताव केवल इजरायल की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, जबकि फिलिस्तीनियों के मानवीय, राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारों को हाशिए पर धकेल देता है।
भले ही आधिकारिक तौर पर युद्धविराम लागू है, लेकिन गज़ा में हिंसा पूरी तरह थमी नहीं है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर से अब तक इजरायली हमलों में 765 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। गज़ा के उन हिस्सों में हमास ने फिर से अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है जहाँ इजरायली सेना मौजूद नहीं है, जबकि इजरायली वायुसेना समय-समय पर लक्षित हमले जारी रखे हुए है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ अब एक ऐसे रोडमैप पर काम कर रहे हैं जिसमें अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती और इजरायली सेना की पूर्ण वापसी शामिल हो, लेकिन निरस्त्रीकरण की मांग इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।