पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को राहत देने की पहल
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समयसीमा और मतदान की पात्रता
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आवेदन की प्रक्रिया और आंकड़े
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साठ लाख से अधिक नाम हटाये गये
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह स्पष्ट किया है कि यदि ट्रिब्यूनल मतदान से दो दिन पहले পর্যন্ত किसी मतदाता के आवेदन का निपटारा कर उसे मंजूरी दे देता है, तो वह व्यक्ति वोट दे सकेगा।
राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का 29 अप्रैल को होना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार जिन 152 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे, यदि ट्रिब्यूनल 21 अप्रैल तक उनके आवेदनों का निपटारा कर उन्हें हरी झंडी दे देता है, तो वे मतदान कर सकेंगे। दूसरे चरण के मतदाताओं के लिए यह समयসীमा 27 अप्रैल निर्धारित की गई है।
आमतौर पर, चुनाव आयोग नामांकन की अंतिम तिथि पर मतदाता सूची को फ्रीज कर देता है, लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रियायत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आवेदन करना पर्याप्त नहीं होगा; ट्रिब्यूनल द्वारा आवेदन का निपटारा कर नाम सूची में शामिल करने की अनुमति मिलना अनिवार्य है।
राज्य में कुल 60,06,675 मतदाताओं के नाम विचाराधीन श्रेणी में थे। इनमें से लगभग 27 लाख लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए थे। अब ये लोग ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। आवेदन के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है। लोग ईसीआईनेट मोबाइल ऐप या चुनाव आयोग की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जिला मजिस्ट्रेट या अनुमंडल अधिकारी के कार्यालय में भी आवेदन जमा किए जा सकते हैं।
इन आवेदनों के त्वरित निपटारे के लिए 19 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ एक विशेष अपील ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 32,68,119 लोगों के नाम मतदाता सूची में वापस आ चुके हैं, जबकि 27,16,393 नाम हटा दिए गए हैं। जिन लोगों के नाम खारिज किए गए हैं, उनके पास अब मतदान से दो दिन पहले तक अपनी पात्रता साबित करने का मौका है।