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महिला आरक्षण विधेयक पर लोकसभा में चर्चा प्रारंभ

किसी खास दल के फायदे के लिए नहीं हैः पीएम मोदी

  • विधेयक के पक्ष में 251 वोट पड़े

  • इसके साथ ही परिसीमन विधेयक पेश

  • प्रधानमंत्री ने कहा यह मेरी गारंटी है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े नए विधेयक पर चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि यह कदम किसी एक राजनीतिक दल को लाभ पहुँचाने के लिए नहीं है और इससे किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को संसद के विशेष सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जिसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के कार्यान्वयन में तेजी लाना है।

मुख्य बिंदु और मतदान का विवरण

लोकसभा में इस विधेयक को पेश करने के दौरान हुए मत-विभाजन में पक्ष में 251 और विरोध में 185 वोट पड़े। इसके साथ ही परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किए गए। इन विधेयकों को पारित करने के लिए शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) शाम 4 बजे मतदान होगा।

पीएम मोदी ने विपक्ष से आग्रह किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े इस कदम को राजनीतिक रंग न दिया जाए। दक्षिण भारतीय राज्यों में व्याप्त इस डर को दूर करते हुए कि उत्तर भारतीय राज्यों को परिसीमन से अधिक लाभ होगा, प्रधानमंत्री ने गारंटी दी कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक किसी भी राज्य के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। उन्होंने यहाँ तक कहा कि वे विपक्ष को ब्लैंक चेक देने को तैयार हैं ताकि वे इस ऐतिहासिक सुधार का श्रेय ले सकें।

विपक्षी गठबंधन इंडिया और कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को बुलडोज करना चाहती है और इसे अपने राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। विपक्ष की मांग है कि यदि सरकार वास्तव में प्रतिबद्ध है, तो इसे मौजूदा सीटों की संख्या के आधार पर तुरंत लागू किया जाए। गौरव गोगोई ने इन विधेयकों को महिला विरोधी और संघीय ढांचे के खिलाफ करार दिया। विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी कि लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 तक करने के प्रस्ताव से राज्यों का प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है। अंततः, विपक्षी दलों ने परिसीमन प्रावधानों के खिलाफ मतदान करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है।