Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Tamil Nadu Politics: चेन्नई से दिल्ली तक हलचल; एक्टर विजय ने सरकार बनाने के लिए क्यों मांगा कांग्रेस... Delhi Air Pollution: दिल्ली के प्रदूषण पर अब AI रखेगा नजर; दिल्ली सरकार और IIT कानपुर के बीच MoU साइ... West Bengal CM Update: नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से पहले कोलकाता पहुंचेंगे अमित शाह; 8 मई को विधाय... West Bengal CM Race: कौन होगा बंगाल का अगला मुख्यमंत्री? सस्पेंस के बीच दिल्ली पहुंचीं अग्निमित्रा प... Crime News: पत्नी से विवाद के बाद युवक ने उठाया खौफनाक कदम, अपना ही प्राइवेट पार्ट काटा; अस्पताल में... Bihar Cabinet Expansion 2026: सम्राट कैबिनेट में JDU कोटे से ये 12 चेहरे; निशांत कुमार और जमा खान के... UP News: 70 साल के सपा नेता ने 20 साल की युवती से रचाया ब्याह; दूसरी पत्नी का आरोप- 'बेटी की उम्र की... प्लास्टिक के कचरे से स्वच्छ ईंधन बनाया MP Govt Vision 2026: मोहन सरकार का बड़ा फैसला; 2026 होगा 'कृषक कल्याण वर्ष', खेती और रोजगार के लिए 2... Wildlife Trafficking: भोपाल से दुबई तक वन्यजीवों की तस्करी; हिरण को 'घोड़ा' और ब्लैक बक को 'कुत्ता' ...

अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार को दी चेतावनी

दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता को दूर करने मोदी सरकार

  • दक्षिण राज्यों की आशंका को समझें

  • यह काफी संवेदनशील विषय है देश का

  • भाषाई अस्मिता का सवाल भी जुड़ा है

राष्ट्रीय खबर

जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार को आगाह किया है। बुधवार को जयपुर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दक्षिण भारतीय राज्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से संबोधित करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस संवेदनशील विषय को सावधानी से नहीं संभाला गया, तो देश में उत्तर-दक्षिण का विभाजन और तनाव बढ़ सकता है।

राजनीतिक और भाषाई अस्मिता का संकट गहलोत ने कहा कि कई दक्षिण भारतीय मुख्यमंत्रियों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाएं और गुस्सा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गहरी असुरक्षा का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा, मैं यह जानबूझकर दोहरा रहा हूं—अगर दक्षिण के लोगों को यह लगने लगा कि उत्तर भारत उन पर अपना वर्चस्व थोप रहा है और उनकी स्थिति को कमजोर कर रहा है, तो स्थिति बिगड़ सकती है।

उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि दक्षिण में 1950 और 60 के दशक के आंदोलनों जैसी स्थिति दोबारा पैदा होने के संकेत मिल रहे हैं। गहलोत के अनुसार, यह एक खतरनाक संकेत है जो दिखाता है कि दक्षिण के राज्यों में भावनाएं कितनी गहरी और संवेदनशील हैं।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए गहलोत ने स्पष्ट किया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इसके पक्ष में हैं। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 2021 में निर्धारित जनगणना क्यों नहीं कराई गई? उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि अब अधिकारी कह रहे हैं कि जनगणना एक वर्ष के भीतर पूरी हो सकती है, जबकि इसे लंबे समय तक टाला गया।

गहलोत ने सरकार की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, फिर भी संसद बुलाई गई है। विपक्ष ने चुनाव खत्म होने तक रुकने का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार जल्दबाजी में है। उन्होंने 2011 की जनगणना के आंकड़ों को परिसीमन का आधार बनाए जाने की रिपोर्टों पर भी आपत्ति जताई और इसे असंगत करार दिया।

लोकतंत्र और चुनावी रणनीति पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की रणनीति विपक्षी दलों को मुश्किल स्थिति में डालने की हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन विधेयक पारित नहीं होता है, तो दोष विपक्ष पर मढ़ा जा सकता है। गहलोत ने ऐसी रणनीतियों को लोकतंत्र के लिए अस्वास्थ्यकर बताया। उन्होंने मांग की कि सरकार को राज्यों के बीच किसी भी प्रकार के असंतोष को पनपने देने के बजाय आम सहमति बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि देश की एकता और संघीय ढांचा सुरक्षित रहे।