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नया माईनिंग लीज किसके लिए दियाः अशोक गहलोत

सरकारी फैसले के यू टर्न के बाद निकल रहे नये तथ्य

राष्ट्रीय खबर

जयपुर: राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरावली पर्वतमाला में नए खनन पट्टों के आवंटन को लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय  के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की अवहेलना कर रही है। गहलोत के अनुसार, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र में खनन की अनुमति देना न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि यह न्यायपालिका की अवमानना भी है।

सुप्रीम कोर्ट की रोक और सरकार का कदम गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए एक सतत खनन प्रबंधन योजना तैयार होने तक नए खनन पट्टों के आवंटन पर अंतरिम रोक लगा रखी है। गहलोत का दावा है कि इस सख्त आदेश के बावजूद, राज्य सरकार ने आनन-फानन में 126 नए खनन पट्टे जारी कर दिए हैं। इनमें से 50 पट्टे सीधे तौर पर अरावली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 9 महत्वपूर्ण जिलों को प्रभावित करते हैं, जिनमें राजधानी जयपुर और औद्योगिक क्षेत्र अलवर जैसे संवेदनशील इलाके शामिल हैं।

तकनीकी खामियों का फायदा उठाने का आरोप अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार इन पहाड़ियों को अरावली की परिभाषा से बाहर रखने के लिए तकनीकी दांवपेच का सहारा ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी इन पहाड़ियों की ऊंचाई 100 मीटर से कम बताकर इन्हें खनन के लिए वैध ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अदालत के आदेशों से बचा जा सके। गहलोत ने इसे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करने वाली कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि ये रेगिस्तान के विस्तार को रोकने वाली एक प्राकृतिक दीवार हैं, जिनके साथ खिलवाड़ करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डालना है।

पारिस्थितिक संरक्षण की अपील पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से इन फैसलों की तत्काल समीक्षा करने और पर्यावरण के प्रति अपनी वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खनन माफियाओं के हितों को साधने के बजाय सरकार को अदालत के उन जनादेशों का पालन करना चाहिए जो पर्यावरण की रक्षा के लिए दिए गए हैं। यह विवाद अब आने वाले समय में कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर और अधिक गरमाने की उम्मीद है, क्योंकि अरावली का संरक्षण राजस्थान की जलवायु स्थिरता के लिए अनिवार्य माना जाता है।